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राज्योत्सव में दिखी जंगलों की विरासत और रोजगार की तस्वीर, बांस शिल्प से हर्बल उत्पादों तक आकर्षण

वन मंत्री केदार कश्यप ने किया प्रदर्शनी का निरीक्षण; 2 साल में 7 करोड़ पौधे रोपे, किसान वृक्ष मित्र योजना से 36 हजार से ज्यादा किसान जुड़े

रायपुर। राज्योत्सव में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी जंगलों के संरक्षण के साथ आदिवासी संस्कृति और ग्रामीण रोजगार की कहानी बयां कर रही है। नवा रायपुर में लगी इस प्रदर्शनी में बांस से बनी कलाकृतियां, वनोपज से तैयार खाद्य और औषधीय उत्पादों के साथ पौधरोपण और वन्यजीव संरक्षण की पहल दिखाई गई है। सोमवार को वन मंत्री केदार कश्यप ने प्रदर्शनी का निरीक्षण किया। उन्होंने वन धन केंद्रों से जुड़े उत्पादों का स्वाद भी चखा।

चेंदरू द्वार से दिखाई सह-अस्तित्व की कहानी

प्रदर्शनी का मुख्य द्वार इंद्रावती टाइगर रिजर्व के प्रसिद्ध चेंदरू द्वार की तर्ज पर बनाया गया है। इसमें बस्तर के आदिवासी युवक चेंदरू और बाघ की दोस्ती को दर्शाया गया है। यह मानव और वन्यजीवों के सह-अस्तित्व का संदेश देता है। मंत्री ने वन धन विकास केंद्र की महिलाओं से चर्चा कर वनोपज से दवाएं बनाने की प्रक्रिया जानी। उन्होंने कोदो के बिस्कुट का स्वाद भी चखा।

किसानों ने लगाए 3.67 करोड़ पौधे

प्रदर्शनी में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 2024 में 3.50 करोड़ और 2025 में 3.55 करोड़ पौधरोपण की जानकारी दी गई है। किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत 36,896 किसानों ने 62,441 एकड़ निजी जमीन पर 3.67 करोड़ पौधे लगाए हैं।

बांस शिल्प और हर्बल उत्पादों की प्रदर्शनी

स्टॉल पर बांस से बने घर, नाव, मछली, लालटेन और सजावटी सामान प्रदर्शित हैं। वन धन केंद्रों के शहद, आंवला और अन्य उत्पाद भी उपलब्ध हैं। हर्बल स्टॉल पर त्रिफला, आंवलकी चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू और महाभृंगराज तेल जैसे उत्पाद रखे गए हैं।

प्रदर्शनी में बदलते बस्तर की तस्वीर भी दिखाई गई है। कांगेर वैली में 35 जिप्सियों के संचालन से करीब 200 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की जानकारी दी गई है। वहीं, औषधीय पौधों की खेती से ग्रामीण महिलाओं को सालाना 20 से 30 हजार रुपए तक कमाई का अवसर बताया गया है।

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