सावरकर मानहानि केस: प्रपौत्र का कोर्ट में बयान- राजनीतिक प्रयासों से हुई थी रिहाई, केवल दया याचिकाओं से नहीं

पुणे। स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर से जुड़े मानहानि मामले में उनके प्रपौत्र सत्यकी सावरकर ने अदालत में महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने विशेष अदालत में कहा कि सावरकर की रिहाई केवल दया याचिकाओं के कारण नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक स्तर पर किए गए प्रयास भी महत्वपूर्ण थे।
यह मामला कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि याचिका से जुड़ा है। अदालत में गवाही के दौरान सत्यकी सावरकर ने कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं को केवल दया याचिकाओं के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, उस समय कई राजनीतिक और सामाजिक प्रयास भी हुए थे, जिनकी भूमिका सावरकर की रिहाई में रही।
हालांकि, जिरह के दौरान सत्यकी सावरकर ने यह भी स्वीकार किया कि वे निश्चित रूप से यह नहीं कह सकते कि विनायक दामोदर सावरकर ने ब्रिटिश सरकार को किसी शर्त के तहत राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहने का आश्वासन दिया था या नहीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें इस बात की प्रत्यक्ष जानकारी नहीं है कि दया याचिकाओं में ‘आपका आज्ञाकारी सेवक’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था या नहीं।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष उपलब्ध दस्तावेजों में वर्ष 1920 की एक दया याचिका का उल्लेख भी किया गया, जिसमें ऐसे शब्द दर्ज होने की बात सामने आई। इस पर अदालत में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे।
राहुल गांधी के खिलाफ यह मानहानि मामला उनके उस बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने सावरकर को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद सावरकर परिवार की ओर से अदालत का रुख किया गया था। मामले की अगली सुनवाई अब 7 जुलाई को होगी, जहां दोनों पक्ष आगे अपनी दलीलें पेश करेंगे। इस मामले पर देशभर में राजनीतिक और ऐतिहासिक बहस भी लगातार जारी है।





