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डेयरी व्यवसाय से संध्या बनीं आत्मनिर्भर, दूध की बिक्री से हर महीने 15 हजार की बचत

सरकारी योजना से मिला अनुदान; रोज 30 लीटर दूध उत्पादन, खर्च निकालकर सालाना 1 से 1.5 लाख रुपए की बचत

रायपुर। ग्रामीण महिलाओं के लिए पशुपालन नियमित आमदनी और आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बन रहा है। सरगुजा जिले के ग्राम लमगांव की संध्या ने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना से मिले सहयोग का उपयोग कर डेयरी व्यवसाय को सफल स्वरोजगार में बदल दिया है। वर्ष 2024 में योजना के तहत मिले अनुदान के बाद उन्होंने पशुपालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया। अब उनकी डेयरी से रोज करीब 30 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।

संध्या दूध की बिक्री से हर महीने करीब 30 हजार रुपए की आमदनी कर रही हैं। पशुओं के चारे, पानी और अन्य खर्च निकालने के बाद लगभग 15 हजार रुपए की बचत होती है। इस तरह सालभर में उनकी बचत करीब 1 से 1.5 लाख रुपए तक पहुंच रही है। नियमित आमदनी ने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ संध्या को आत्मनिर्भर बनाया है।

योजना के अनुदान से डेयरी को मिली नई दिशा

संध्या के मुताबिक, वर्ष 2024 में छत्तीसगढ़ शासन की राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत उन्हें अनुदान मिला था। इस आर्थिक सहयोग से गायों के पालन-पोषण और डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली। पशुओं की नियमित देखभाल और बेहतर प्रबंधन से दूध उत्पादन में वृद्धि हुई।

तीन बछियां बढ़ाएंगी पशुधन

संध्या के पास तीन बछियां भी हैं, जिन्हें वे भविष्य में डेयरी व्यवसाय बढ़ाने के लिए तैयार कर रही हैं। बछियों के बड़े होने के बाद पशुधन बढ़ेगा और दूध उत्पादन में भी वृद्धि की संभावना है। इससे वे आने वाले समय में डेयरी का विस्तार करने की तैयारी कर रही हैं।

संध्या ने योजना से मिले सहयोग के लिए पशुधन विकास विभाग के प्रति आभार जताया है। उनकी कहानी बताती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, मेहनत और पशुओं की बेहतर देखभाल ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका का आधार बन सकती है।

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