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निक्षय मित्र बने टीबी मरीजों की उम्मीद,जशपुर में एक पहल ने बदली 60 परिवारों की जिंदगी

रायपुर। टीबी केवल एक संक्रामक बीमारी नहीं, बल्कि गरीबी, कुपोषण और सामाजिक चुनौतियों से जुड़ी गंभीर समस्या है।

इलाज के दौरान मरीजों को दवाओं के साथ पौष्टिक भोजन और मानसिक सहयोग की भी आवश्यकता होती है।

इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत “निक्षय मित्र” की पहल शुरू की गई है, जो टीबी मरीजों को पोषण और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराकर उनके उपचार को सफल बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से इस अभियान की एक प्रेरक मिसाल सामने आई है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत जिला डाटा प्रबंधक निरंजन प्रसाद गुप्ता ने अक्टूबर 2024 से निक्षय मित्र की जिम्मेदारी निभाते हुए विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) के 19 टीबी मरीजों सहित जिले के कुल 60 मरीजों को गोद लिया।

उन्होंने नियमित रूप से मरीजों को पोषण आहार उपलब्ध कराया और उपचार के दौरान हर संभव सहयोग देकर उनका मनोबल बढ़ाया।

जशपुर के पहाड़ी कोरवा और बिरहोर जैसे दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान नहीं है।

ऐसे में निरंजन गुप्ता ने घर-घर जाकर मरीजों और उनके परिजनों को टीबी के लक्षण, नियमित दवा सेवन, संक्रमण से बचाव और पूरा उपचार लेने के महत्व के बारे में जागरूक किया।

उनके लगातार प्रयासों से मरीजों में उपचार के प्रति विश्वास बढ़ा और स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने की प्रवृत्ति भी मजबूत हुई।

विशेषज्ञों के अनुसार टीबी और कुपोषण का गहरा संबंध है। पर्याप्त पोषण मिलने से मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और उपचार अधिक प्रभावी होता है।

यही कारण है कि निक्षय मित्रों की भूमिका केवल पोषण किट देने तक सीमित नहीं, बल्कि मरीजों को मानसिक और सामाजिक संबल देने तक भी है।

उल्लेखनीय योगदान के लिए निरंजन प्रसाद गुप्ता को दिसंबर 2024 में राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से ही संभव है।

जशपुर की यह पहल साबित करती है कि एक व्यक्ति का संवेदनशील प्रयास भी कई परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है।

अधिक से अधिक नागरिक, संस्थाएं और सामाजिक संगठन निक्षय मित्र बनकर इस अभियान से जुड़ें, ताकि कोई भी टीबी मरीज संसाधनों के अभाव में उपचार से वंचित न रहे।

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