नदियों के पुनरुद्धार को लेकर राज्य स्तरीय समिति की बैठक, कैचमेंट एरिया में जल संरक्षण कार्यों पर जोर

मुख्य सचिव विकासशील ने कलेक्टरों को दिए नदी संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश
रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित राज्य की प्रमुख नदियों के पुनरुद्धार एवं पुनर्जीवन संबंधी राज्य स्तरीय समिति की बैठक सोमवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव विकासशील ने की। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि नदियों का संरक्षण केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह जन स्वास्थ्य और भविष्य की जल सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी कलेक्टरों को उच्च न्यायालय की गाइडलाइन के अनुसार नदियों के पुनरुद्धार के कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि नदियों के कैचमेंट एरिया में ऐसे कार्य किए जाएं, जो स्थानीय लोगों की जरूरतों के अनुरूप हों और लंबे समय तक उपयोगी साबित हों। उन्होंने इन कार्यों में ग्राम पंचायतों के सरपंचों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिले से निकलने वाली नदियों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की जानकारी तैयार की जाए, ताकि नई पीढ़ी को नदियों के महत्व से जोड़ा जा सके। इसके लिए स्कूल के विद्यार्थियों को नदी उद्गम स्थलों का भ्रमण कराने और नदियों से संबंधित प्रतियोगिताएं आयोजित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही नदी उद्गम क्षेत्रों में मेला और उत्सव जैसे आयोजन करने की संभावनाएं तलाशने को कहा गया।
बैठक में रायगढ़, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सरगुजा, कोरिया, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, गरियाबंद और धमतरी जिलों के कलेक्टरों ने अपने-अपने क्षेत्रों की नदियों की स्थिति और चल रही कार्ययोजनाओं की जानकारी दी।
मुख्य सचिव ने नदियों के कैचमेंट एरिया में वृक्षारोपण, जल संरक्षण, वाटर रिचार्ज और आवश्यक जल संरचनाओं के निर्माण के लिए वीबीजीरामजी, कैंपा, मनरेगा, डीएमएफ सहित अन्य मदों से कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने नदियों के महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन से जोड़ने और नदी में किसी भी प्रकार का अपशिष्ट नहीं डालने के लिए सतत निगरानी रखने को कहा।
बैठक में प्रोफेसर डॉ. एमके वर्मा और एनआईटी के जल विज्ञानी प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने नदी संरक्षण, जल प्रबंधन और पर्यावरण से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर जानकारी दी। इस अवसर पर जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, वन, खनिज, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, छत्तीसगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय भू-जल बोर्ड के अधिकारी मौजूद रहे।



