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भालूडिग्गी पहाड़ी में नक्सली डंप से 46 लाख कैश और हथियार बरामद

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सुरक्षाबलों को नक्सल विरोधी अभियान में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। ओडिशा बॉर्डर से लगे मैनपुर थाना क्षेत्र के भालूडिग्गी पहाड़ में जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए 46 लाख 31 हजार 500 रुपये नकद और भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं।

यह कामयाबी 28 फरवरी को गरियाबंद जिला पुलिस बल (E-30) और डीआरजी धमतरी की संयुक्त टीम को मिली। दरअसल, शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों ने पूछताछ में इस ‘डंप’ (छिपाए गए सामान) की जानकारी दी थी। नक्सलियों ने ड्रमों में भरकर कैश और विस्फोटक सामग्री जमीन में गाड़ दी थी।

गरियाबंद के जंगलों में पुलिस को दो अलग-अलग डंप मिले हैं। इनमे से कैश कुल 46.31 लाख रुपये बरामद हुए, जिसमें 2,000 रुपये के 100 पुराने नोट और बाकी 500 रुपये के नोट शामिल हैं। वहीं दूसरे डंप से ग्रेनेड, बंदूकें, कारतूस और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए।

नेटवर्क विस्तार की थी योजना

जांच में यह बात सामने आई है कि इन पैसों का इस्तेमाल पश्चिम ओडिशा में नक्सली संगठन के विस्तार, नए कैडरों की भर्ती, हथियार खरीदने और नेटवर्क को मजबूत करने के लिए किया जाना था। भालूडिग्गी पहाड़ कभी नक्सलियों का सुरक्षित गढ़ माना जाता था, जहाँ से सीसी मेंबर चलपति (90 लाख का इनामी) धमतरी और गरियाबंद इलाकों को कंट्रोल करता था।

जनवरी 2025 में हुए बड़े एनकाउंटर के बाद इस इलाके में नक्सली संगठन पूरी तरह टूट चुका है। एडिशनल एसपी धीरेंद्र पटेल के अनुसार, गरियाबंद पुलिस अब तक अलग-अलग कार्यवाहियों में नक्सलियों का कुल 1.08 करोड़ रुपये कैश बरामद कर चुकी है। यह बरामदगी नक्सलियों की आर्थिक कमर तोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

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