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सीड बॉल अभियान: हरियाली बढ़ाने का आसान और असरदार तरीका, जनभागीदारी से साकार हो रहा हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प

रायपुर। बारिश का मौसम पौधारोपण और वनों के विस्तार के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ वन विभाग सीड बॉल (बीज गोला) अभियान चला रहा है।

यह अभियान उन दुर्गम और खाली क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने का सरल, किफायती और प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है, जहां पारंपरिक तरीके से पौधारोपण करना कठिन होता है।

सीड बॉल मिट्टी, जैविक खाद (गोबर या वर्मीकम्पोस्ट) और विभिन्न वृक्षों के बीजों से तैयार किया गया छोटा गोलाकार गोला होता है।

बीजों को इस प्राकृतिक आवरण में सुरक्षित कर सुखाया जाता है। मानसून के दौरान इन्हें जंगलों, पहाड़ियों, खाली जमीन और अन्य उपयुक्त स्थानों पर फेंक दिया जाता है।

बारिश का पानी मिलने पर बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग “एक पेड़ मां के नाम”, “वन महोत्सव” और “युवा फॉर नेचर” जैसे अभियानों के साथ सीड बॉल कार्यक्रम को भी व्यापक स्तर पर संचालित कर रहा है।

स्कूलों, कॉलेजों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से हजारों सीड बॉल तैयार कर विभिन्न क्षेत्रों में डाली जा रही हैं।

सीड बॉल में महुआ, इमली, हर्रा, बहेड़ा, जामुन, करंज, नीम, बरगद, पीपल, शाल, बीजा और चार जैसी स्थानीय प्रजातियों के बीजों का उपयोग किया जाता है।

इससे प्राकृतिक वनों का विस्तार होने के साथ वन्यजीवों को भोजन और आश्रय मिलता है तथा जैव विविधता का संरक्षण भी होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सीड बॉल अभियान हरित आवरण बढ़ाने के साथ जल संरक्षण, मिट्टी के कटाव को रोकने, कार्बन अवशोषण बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी मददगार है।

वन विभाग का मानना है कि यदि प्रत्येक नागरिक वर्षा ऋतु में कुछ सीड बॉल तैयार कर उपयुक्त स्थानों पर डाले, तो जनभागीदारी से हरित और पर्यावरण-संतुलित छत्तीसगढ़ का सपना तेजी से साकार हो सकता है।

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