StateNewsदेश - विदेश

गलवान तनाव के बाद फिर खुलेगा भारत-चीन व्यापार मार्ग, 7 साल बाद लिपुलेख से तकलाकोट जाएंगे व्यापारी

दिल्ली। भारत और चीन के बीच 2020 के गलवान संघर्ष के बाद बंद हुआ लिपुलेख व्यापार मार्ग अब फिर से खुलने जा रहा है। करीब सात साल बाद उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से भारतीय व्यापारी तिब्बत के तकलाकोट बाजार तक पहुंच सकेंगे। व्यापार शुरू करने के लिए 300 व्यापारियों की सूची विदेश मंत्रालय को भेजी गई है।

इस बार व्यापारिक गतिविधियों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। पहले व्यापारी घोड़ों और खच्चरों के जरिए सामान चीन पहुंचाते थे, लेकिन अब सीमा तक सड़क बनने के कारण सामान वाहनों और ट्रकों के माध्यम से भेजा जाएगा। व्यापारियों को बिना वीजा और पासपोर्ट के विशेष ट्रेड पास के जरिए सीमा पार जाने की अनुमति मिलेगी।

लिपुलेख मार्ग सदियों पुराना व्यापारिक रास्ता माना जाता है, जो केवल कारोबार ही नहीं बल्कि हिमालयी सभ्यताओं और सांस्कृतिक रिश्तों का भी प्रतीक रहा है। पहले तिब्बती व्यापारी याक और भेड़ों के जरिए नमक, ऊन और बोरेक्स भारत लाते थे, जबकि भारतीय व्यापारी कपड़े, मसाले और अनाज तिब्बत पहुंचाते थे।

गलवान वैली विवाद के बाद यह व्यापार पूरी तरह बंद हो गया था। इससे पहले 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान भी यह मार्ग बंद हुआ था, जिसे 1991 में दोबारा शुरू किया गया था। अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयासों के बाद व्यापार बहाली को रिश्तों में सुधार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

व्यापार शुरू होने से सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। ब्यास, दारमा और चौंदास घाटी के लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि लिपुलेख पास क्षेत्र को लेकर नेपाल की आपत्तियां और पुराना सीमा विवाद अब भी इस इलाके को रणनीतिक रूप से संवेदनशील बनाए हुए हैं।

Related Articles

Back to top button