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खून बढ़ाने से लेकर कैंसर से बचाव तक, महासमुंद में हो रही ‘संजीवनी’ धान की अनोखी खेती

रायपुर। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के कौंदकेरा गांव में किसान योगेश्वर चंद्राकर एक ऐसी खास धान की खेती कर रहे हैं, जिसे औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है।

‘संजीवनी धान’ नाम की यह किस्म ब्रेस्ट कैंसर से बचाव, शरीर में खून की कमी दूर करने और शुगर कंट्रोल में मददगार बताई जा रही है। यही वजह है कि इस चावल की मांग अब कई राज्यों में तेजी से बढ़ रही है।

योगेश्वर चंद्राकर करीब एक एकड़ जमीन में इस धान की जैविक खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के उपयोग से इस धान के औषधीय गुण कम हो जाते हैं, इसलिए वे केवल जैविक खाद, गोमूत्र, नीमास्त्र, छाछ और पंचगव्य का इस्तेमाल करते हैं। खेती में सड़े पत्तों और केंचुआ खाद का उपयोग किया जाता है।

संजीवनी धान की फसल सामान्य धान की तुलना में बड़ी होती है। इसका पौधा करीब 6 फीट तक लंबा हो जाता है और तैयार होने में लगभग 145 दिन लगते हैं।

तेज हवा और बारिश से फसल गिरने का खतरा रहता है, इसलिए खेतों में बांस और लोहे की डंडियों का सहारा दिया जाता है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक इस धान में सामान्य चावल की तुलना में 231 अतिरिक्त फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं। इनमें से कई तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं।

भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में इस चावल पर हुए परीक्षणों में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

इस धान की मांग भोपाल, दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र और ओडिशा तक पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि इसका चावल मशीन से नहीं, बल्कि हाथ से निकाला जाता है। इसे सामान्य चावल की तरह पकाकर नहीं खाया जाता, बल्कि पानी में भिगोकर औषधि के रूप में सेवन किया जाता है।

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