डेयरी विकास को मिलेगी नई रफ्तार: बस्तर और सरगुजा पर सरकार का फोकस, 1500 से ज्यादा महिला दुग्ध उत्पादकों को मिल रहा सीधा लाभ

रायपुर। छत्तीसगढ़ में डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने और दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (सीजीसीडीएफ) की राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में डेयरी क्षेत्र के समग्र विकास, महिला दुग्ध उत्पादकों की भागीदारी बढ़ाने और दुग्ध संग्रहण एवं विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में बस्तर और सरगुजा संभाग को विशेष प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। बस्तर संभाग के सातों जिलों में बड़ी संख्या में ग्रामीण और आदिवासी परिवार पशुपालन से जुड़े हुए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में करीब 88 प्रतिशत गायें स्थानीय नस्ल की हैं। ऐसे में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सरगुजा संभाग में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से डेयरी परियोजनाओं का विस्तार किया जा रहा है। जून 2025 से जशपुर में 2 हजार लीटर और बलरामपुर में 5 हजार लीटर क्षमता वाले चिलिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।
वर्तमान में 45 मिल्क कलेक्शन सेंटर के माध्यम से प्रतिदिन करीब 3,500 लीटर दूध का संग्रह किया जा रहा है।
इस परियोजना से 1,500 से अधिक महिला दुग्ध उत्पादक सीधे जुड़ी हुई हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दूध उत्पादकों के भुगतान की राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा की जा रही है।
इससे पारदर्शिता बढ़ी है और महिलाओं को नियमित आय का लाभ मिल रहा है।
बैठक में पिछली बैठकों की कार्रवाई रिपोर्ट, मानव संसाधन की चुनौतियों, भौतिक और वित्तीय प्रगति तथा डेयरी विकास योजनाओं की समीक्षा भी की गई। इस दौरान विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।





