CGPSC घोटाला: हाईकोर्ट ने पूर्व सचिव की जमानत खारिज की, कहा- पेपर लीक हत्या से भी बड़ा अपराध

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) परीक्षा-2021 के बहुचर्चित भर्ती घोटाले और पेपर लीक मामले में जेल में बंद आयोग के पूर्व सचिव एवं रिटायर्ड IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली।
बिलासपुर हाईकोर्ट की जस्टिस बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक कर लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करना हत्या से भी बड़ा अपराध है।
अदालत ने टिप्पणी की कि हत्या से एक परिवार प्रभावित होता है, जबकि पेपर लीक जैसी घटनाएं पूरे समाज और युवाओं के विश्वास को नुकसान पहुंचाती हैं।
मामले में CGPSC के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव और अन्य अधिकारियों पर अपने रिश्तेदारों व पसंदीदा अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है।
CBI जांच में सामने आया कि ध्रुव ने अक्टूबर 2020 में सचिव पद संभालने के बाद 2021 भर्ती परीक्षा से जुड़े गोपनीय प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले हासिल कर अपने बेटे सुमित ध्रुव तक पहुंचाए। आरोप है कि इसी के आधार पर सुमित का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ।
CBI की छापेमारी में पूर्व सचिव के भिलाई स्थित घर से मुख्य परीक्षा के पेपर-7 के 47 में से 42 प्रश्नों के उत्तर, निबंध की उत्तर पुस्तिकाएं और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए।
जांच में यह भी सामने आया कि जिन चार विषयों की तैयारी सुमित ने पहले से की थी, वही विषय मुख्य परीक्षा में पूछे गए।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि जीवन किशोर ध्रुव का नाम मूल FIR में नहीं था और उन्होंने अपने बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी पहले ही आयोग को दे दी थी।
वहीं CBI ने कहा कि आरोपी परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार संवैधानिक पद पर था और उसके खिलाफ मिले दस्तावेज व गवाहों के बयान गंभीर आपराधिक साजिश की पुष्टि करते हैं।
गौरतलब है कि CGPSC-2021 में 171 पदों पर भर्ती हुई थी। भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी थी।



