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लोरिक चंदा की कथा, ददरिया की मिठास और चंदैनी के सुरों से सजा लोकरंग पर्व

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन की झलक ‘लोकरंग पर्व’ के दूसरे दिन देखने को मिली। मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित कार्यक्रम में लोरिक चंदा, ददरिया और चंदैनी की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया। लोकसुरों और पारंपरिक गायन शैली से पूरा वातावरण छत्तीसगढ़ी रंग में रंग गया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रदेश की लोकप्रिय लोकगाथा ‘लोरिक चंदा’ के भावपूर्ण प्रसंग से हुई। श्री व्यासनाथ योगी और उनके साथियों ने गायन और कथात्मक प्रस्तुति के जरिए लोकगाथा को मंच पर जीवंत किया। इसके बाद श्री विजय साहू एवं साथियों ने ददरिया प्रस्तुत किया। ददरिया की मधुर धुनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

वहीं बरसन देशलहरे ने चंदैनी के जरिए प्रेम, लोकजीवन और मानवीय संवेदनाओं को सुरों में पिरोया। प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण जीवनशैली और लोकभावनाओं की सहज झलक देखने को मिली।

लोककलाओं के संरक्षण पर जोर

संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि स्थानीय मंच लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने और प्रोत्साहन पाने का अवसर देते हैं। ऐसे आयोजन मनोरंजन के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम हैं।

उन्होंने कहा कि लोरिक चंदा, चंदैनी और ददरिया छत्तीसगढ़ के लोकजीवन की पहचान हैं। इन विधाओं के संरक्षण से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ती है।

कई हस्तियां रहीं मौजूद

कार्यक्रम में पूर्व संचालक अनिल कुमार साहू, उपसंचालक उमेश मिश्रा, कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार विजय मिश्रा और समाजसेवी उदयभान चौहान समेत सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे।

‘लोकरंग पर्व’ के जरिए लोकगाथा, लोकगीत, लोकसंगीत और पारंपरिक लोकनृत्यों को एक मंच पर लाया जा रहा है। दूसरे दिन की प्रस्तुतियों ने आधुनिक दौर में लोकपरंपराओं को सहेजने का संदेश भी दिया।

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