सुकमा में लोकतंत्र की नई शुरुआत: आत्मसमर्पित युवाओं को मिला वोट का अधिकार

सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में लोकतंत्र की दिशा में एक अहम और सकारात्मक पहल सामने आई है। नक्सल पुनर्वास नीति के तहत समाज की मुख्यधारा में लौट रहे आत्मसमर्पित युवाओं को अब मतदान का अधिकार मिल गया है। जिला प्रशासन ने पुनर्वास केंद्र में रह रहे 116 युवाओं के मतदाता परिचय पत्र (वोटर आईडी) बनाकर उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने का काम किया है।
इस पहल के बाद अब ये युवा पंचायत से लेकर विधानसभा स्तर तक अपने जनप्रतिनिधियों का चयन कर सकेंगे। इतना ही नहीं, वे भविष्य में खुद भी चुनाव लड़ने के पात्र बन गए हैं। बंदूक छोड़कर लोकतंत्र की राह पर बढ़ रहे इन युवाओं के लिए यह बदलाव उनके जीवन में सम्मान, आत्मविश्वास और अधिकारों की नई शुरुआत माना जा रहा है।
प्रशासन के अनुसार, राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ इन युवाओं को लगातार दिया जा रहा है। पुनर्वास केंद्र में रह रहे हितग्राहियों के राशन कार्ड, जॉब कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड और श्रम पंजीयन जैसे जरूरी दस्तावेज तैयार किए जा चुके हैं। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनका सर्वे भी पूरा कर लिया गया है, जिससे उन्हें विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके।
आत्मनिर्भरता की दिशा में भी प्रशासन ने अहम कदम उठाए हैं। युवाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक कृषि उद्यमिता, सिलाई, राजमिस्त्री, वाहन चालक और मुर्गी पालन जैसे प्रशिक्षणों में 300 से अधिक युवा हिस्सा ले चुके हैं।
प्रशासन की यह पहल न केवल पूर्व नक्सल प्रभावित युवाओं को समाज में नई पहचान दिला रही है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की ओर भी अग्रसर कर रही है। इसे सुकमा में लोकतंत्र की सशक्त और नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।





