बंदूक छोड़ हाथों में थामा ‘आशीर्वाद का दिया’

अबूझमाड़ में आत्मसमर्पित लोगों ने दीप जलाकर शांति, सेवा और आत्मनिर्भरता का दिया संदेश
रायपुर। नारायणपुर के अबूझमाड़ में कभी नक्सली हिंसा और भय का माहौल रहा, लेकिन अब यहां बदलाव की तस्वीर दिखाई दे रही है। हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटे आत्मसमर्पित लोग अब जनसेवा और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी कर रहे हैं। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम में इन लोगों ने भी दीप प्रज्ज्वलित किए।
आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया से गुजर रहे इन लोगों की यह सहभागिता अबूझमाड़ में बदलते माहौल का संदेश देती है। जिन हाथों में कभी बंदूक थी, उन्हीं हाथों में दीप जलते दिखाई दिए। कार्यक्रम के जरिए शांति, सद्भाव और सामाजिक स्वीकार्यता का संदेश दिया गया।

छत्तीसगढ़ शासन की ‘नक्सलवादी आत्मसमर्पण, पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025’ के तहत आत्मसमर्पित लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। नीति के तहत पुनर्वास के साथ आजीविका और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
नारायणपुर में आत्मसमर्पित लोगों की सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी इसी बदलाव का हिस्सा मानी जा रही है। अब वे केवल अपने परिवार और आजीविका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक आयोजनों में भी आगे आ रहे हैं।
‘आशीर्वाद का दिया’ में दीप प्रज्ज्वलित करने की तस्वीर ने हिंसा से शांति की ओर बढ़ते अबूझमाड़ का संदेश दिया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने समाज के साथ जुड़कर आगे बढ़ने और सकारात्मक गतिविधियों में भागीदारी का संदेश दिया।
यह बदलाव पुनर्वास की प्रक्रिया को केवल हथियार छोड़ने तक सीमित न रखकर सामाजिक और आर्थिक रूप से मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश के तौर पर सामने आया है। आत्मनिर्भरता और जनसेवा से जुड़ने के साथ अबूझमाड़ के इन क्षेत्रों में शांति और विकास की उम्मीद को भी मजबूती मिल रही है।





