छत्तीसगढ़ में 22 सितंबर से बसें बंद करने की चेतावनी: 9 मांगों को लेकर महासंघ ने दिया अल्टीमेटम, हजारों यात्रियों पर पड़ेगा असर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बस से सफर करने वाले यात्रियों की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने 9 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की चेतावनी दी है। महासंघ ने कहा है कि 21 सितंबर 2026 तक मांगों पर ठोस फैसला नहीं हुआ तो 22 सितंबर से प्रदेशभर में बसों का संचालन अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा।
महासंघ की चेतावनी के बाद रोजाना बसों से सफर करने वाले हजारों यात्रियों की चिंता बढ़ गई है। हड़ताल होने पर शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली यात्री बस सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
किराया बढ़ाने से लेकर परमिट तक की मांग
बस संचालकों ने सरकार के सामने यात्री किराया बढ़ाने की मांग प्रमुखता से रखी है। इसके अलावा सिंगल स्लीपर बसों पर सिंगल टैक्स लागू करने और ई-बसों का संचालन शहर की सीमा के भीतर करने की मांग की गई है।
महासंघ ने ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली बसों के ग्रामीण क्षेत्रों और बस स्टैंड से संचालन पर रोक लगाने की भी मांग की है। स्टेज कैरिज बसों के समयचक्र में दो बसों के बीच उचित अंतराल तय करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
VLTD फीस घटाने और ऑनलाइन परमिट की मांग
बस संचालकों ने VLTD डिवाइस के रिन्यूअल की फीस कम करने और बसों के लिए मैनुअल फिटनेस की सुविधा देने की मांग की है। इसके साथ ही प्रतिहस्ताक्षर की प्रक्रिया को नियंत्रित करने और सभी बसों के लिए ऑनलाइन परमिट जारी करने की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखी गई है।
21 सितंबर तक सरकार के फैसले का इंतजार
महासंघ ने सरकार से समय रहते मांगों का समाधान करने की अपील की है। संचालकों का कहना है कि यदि 21 सितंबर तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 22 सितंबर से बसों का संचालन अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा।
अगर हड़ताल होती है तो नौकरी, पढ़ाई और रोजमर्रा के काम के लिए बसों पर निर्भर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल नजर सरकार और परिवहन विभाग की ओर से होने वाली बातचीत और फैसले पर है।





