जम्मू। जम्मू-कश्मीर में इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।
3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलने वाली पवित्र यात्रा के लिए रिकॉर्ड 80 हजार से अधिक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह अमरनाथ यात्रा के इतिहास की सबसे बड़ी सुरक्षा व्यवस्था होगी।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके तहत करीब 60 हजार अर्धसैनिक बलों के जवान जम्मू-कश्मीर में तैनात किए जाएंगे।
इनमें केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) की लगभग 700 कंपनियां शामिल होंगी। इसके अलावा, पहले से राज्य में तैनात जम्मू-कश्मीर पुलिस और भारतीय सेना के करीब 20 हजार जवान भी यात्रा ड्यूटी में लगाए जाएंगे।
सुरक्षा एजेंसियां यात्रा मार्ग, बेस कैंप, संवेदनशील इलाकों और श्रद्धालुओं के ठहराव स्थलों पर विशेष निगरानी रखेंगी। ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, आधुनिक निगरानी उपकरणों और क्विक रिस्पांस टीमों की भी मदद ली जाएगी। यात्रा मार्गों पर लगातार गश्त और सुरक्षा जांच की व्यवस्था की जाएगी।
इस बार सुरक्षा बढ़ाने का एक प्रमुख कारण यात्रा की अवधि का बढ़ना भी है। वर्ष 2025 में अमरनाथ यात्रा 38 दिनों तक चली थी, जबकि इस बार यात्रा लगभग दो महीने तक चलेगी। लंबी अवधि के कारण सुरक्षा बलों को अधिक समय तक तैनात रहना होगा और अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़ेगी।
प्रशासन को इस वर्ष 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचने की उम्मीद है। बड़ी संख्या में आने वाले यात्रियों को देखते हुए आवास, स्वास्थ्य सेवाओं, यातायात और आपदा प्रबंधन की भी विशेष व्यवस्था की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और यात्रा को शांतिपूर्ण एवं सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
