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प्रशिक्षु न्यायाधीश लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ के रूप में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका : सीएम साय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर के प्रशिक्षु न्यायाधीशों से सौजन्य मुलाकात की।

इस गरिमामय भेंट के दौरान मुख्यमंत्री ने न्यायिक सेवा के लिए नव-चयनित अधिकारियों का उत्साहवर्धन किया और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए शुभकामनाएं दीं।

लोकतंत्र का सशक्त आधार: न्यायपालिका
मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए कहा कि न्यायपालिका हमारे लोकतंत्र का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह न केवल संविधान की रक्षक है, बल्कि आम नागरिक के अधिकारों की ढाल भी है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक सेवा मात्र एक करियर नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक पावन उत्तरदायित्व है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि ये युवा अधिकारी अपनी बौद्धिक क्षमता और निष्पक्ष दृष्टिकोण से न्याय व्यवस्था में जनता के अटूट विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।

संवेदनशीलता और निष्पक्षता का मंत्र
मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षु न्यायाधीशों को सलाह दी कि वे अपने कार्यकाल के दौरान निष्पक्षता, संवेदनशीलता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहें।

उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश के निर्णय से न केवल किसी विवाद का समाधान होता है, बल्कि समाज में न्याय की स्थापना होती है। आने वाले समय में इन अधिकारियों के कंधों पर न्याय व्यवस्था से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियां होंगी, जिनका निर्वहन उन्हें मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए करना होगा।

इस अवसर पर विधि विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत और छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की संचालक निधि शर्मा तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने अकादमी के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी सराहना की, जो इन प्रशिक्षुओं को जटिल कानूनी बारीकियों को समझने और व्यावहारिक न्याय प्रदान करने के लिए तैयार कर रहे हैं।

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