छत्तीसगढ़ में डिजिटल भू-अभिलेख और ई-रजिस्ट्री की समीक्षा: केंद्र के भूमि संसाधन सचिव ने मुख्य सचिव से की मुलाकात

रायपुर। भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण ने शुक्रवार को मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील से सौजन्य मुलाकात की।
इस दौरान राज्य में जलग्रहण प्रबंधन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, डिजिटल राजस्व सुधार और ई-पंजीयन व्यवस्था की प्रगति पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने योजनाओं और तकनीकी नवाचारों की जानकारी साझा की।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने राज्य में भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण और ई-गवर्नेंस पर प्रस्तुतीकरण दिया।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण कर मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्थापित किए गए हैं। भुईयां पोर्टल के जरिए डिजिटल किसान किताब अपडेट की गई है, जिसे भूमि स्वामी ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं। वहीं, राजस्व मामलों के त्वरित निराकरण के लिए रेवेन्यू ई-कोर्ट और ऑटो डायवर्सन जैसी सुविधाएं भी लागू की गई हैं।
बैठक में पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग की ऑनलाइन और पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि ई-पंजीयन प्रणाली के तहत दस्तावेजों की रजिस्ट्री अब पूरी तरह डिजिटल माध्यम से हो रही है।
व्हाट्सएप के जरिए अपॉइंटमेंट से लेकर रजिस्ट्री पूरी होने तक की जानकारी खरीदार और विक्रेता को भेजी जा रही है। रजिस्ट्री की कॉपी डाउनलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और जलग्रहण विकास परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान बताया गया कि प्रदेश के 27 जिलों में 387 माइक्रो वाटरशेड क्षेत्रों में काम जारी है।
लगभग 2.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के विकास के लिए 613.66 करोड़ रुपए की परियोजनाएं संचालित हैं। भारत सरकार ने हाल ही में 30.14 करोड़ रुपए की राशि जारी करते हुए परियोजना की अवधि सितंबर 2026 तक बढ़ाई है। बैठक में वाणिज्यिक कर विभाग के सचिव भुवनेश यादव, भारत सरकार के संयुक्त सचिव नितिन खाडे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।





