छत्तीसगढ़ में ढहता नक्सल साम्राज्य: शीर्ष नेतृत्व खत्म, सरेंडर की कगार पर संगठन

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में दशकों से जारी नक्सली दहशत अब अपने अंतिम दौर में है। सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और ‘नक्सल मुक्त अभियान’ के प्रहार ने माओवादी नेटवर्क की कमर तोड़ दी है।
ताजा घटनाक्रम में साउथ सब जोनल ब्यूरो इंचार्ज पापा राव के अपने 17 साथियों (11 पुरुष, 7 महिलाएं) के साथ आत्मसमर्पण की खबर ने संगठन को पूरी तरह धराशायी कर दिया है। 25 लाख के इनामी पापा राव का सरेंडर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी जीत है, क्योंकि वह युवाओं को गुरिल्ला वॉर की ट्रेनिंग देने वाला मुख्य स्तंभ था।
शीर्ष नेता हुए ‘लापता’ और पस्त
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, नक्सलियों का केंद्रीय नेतृत्व अब लगभग खत्म हो चुका है। संगठन के दो सबसे बड़े चेहरे अब केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति नेपाल भाग चुका है और आईबी की कड़ी निगरानी में है। वहीं मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर: पोलित ब्यूरो सदस्य बेसरा फिलहाल झारखंड के गिरिडीह में छिपा है और माना जा रहा है कि वह भी जल्द ही सरेंडर कर सकता है।
नक्सल मुक्त होने की राह पर जिले
दंतेवाड़ा, सुकमा और नारायणपुर जैसे धुर नक्सल प्रभावित इलाकों में अब कोई बड़ा लीडर सक्रिय नहीं बचा है। जगदलपुर और कोंडागांव पहले ही नक्सल मुक्त घोषित हो चुके हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि 31 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बस्तर के शेष पांच जिलों को भी नक्सल मुक्त घोषित कर सकते हैं।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के अनुसार, जो काम दशकों में नहीं हुआ, वह पिछले दो वर्षों में मुमकिन हुआ है। हालांकि, अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिना हथियार वाले ‘रूरल पार्टी कमेटी’ (RPC) सदस्यों को मुख्यधारा में जोड़ना है, जो माइनिंग जैसे विषयों पर विरोध दर्ज कर वैचारिक लड़ाई लड़ रहे हैं।





