सेवैयाकला में हर घर नल से पहुंच रहा पानी, बदली गांव की तस्वीर; अब महिलाओं को नहीं लगानी पड़ती पानी के लिए कतार

महासमुंद। सुबह के वक्त अब महासमुंद के पिथौरा विकासखंड के ग्राम पंचायत टेका के आश्रित गांव सेवैयाकला की गलियों में पानी के बर्तन लिए महिलाओं की कतारें नजर नहीं आतीं। घरों के आंगन में लगे नल खुलते हैं और स्वच्छ पानी की धार बहने लगती है। बच्चों के हाथों में पानी की बाल्टियों की जगह स्कूल का बस्ता है। यह बदलाव जल जीवन मिशन के तहत गांव में पहुंची नियमित नलजल सुविधा से आया है।
सेवैयाकला ने जून 2026 में ‘हर घर जल’ का लक्ष्य हासिल किया। अब गांव के सभी 185 घरों में नल से नियमित स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। ग्रामीणों के लिए यह केवल सरकारी योजना की उपलब्धि नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में आया बड़ा बदलाव है।
गांव की देविका साहू बताती हैं कि पहले पानी लाना सबसे बड़ा काम था। गर्मी के दिनों में कई बार आधा दिन इसी काम में निकल जाता था। अब नल खोलते ही पानी मिल जाता है। इससे समय और मेहनत दोनों बच रहे हैं।
81.52 लाख की लागत से तैयार व्यवस्था
जल जीवन मिशन के तहत गांव में 81 लाख 52 हजार रुपए की लागत से जलापूर्ति व्यवस्था तैयार की गई है। यहां 40 किलोलीटर क्षमता की ऊंची पानी टंकी बनाई गई है। करीब 3,825 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर सभी घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाया गया है। प्राथमिक स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र को भी जलापूर्ति से जोड़ा गया है।
हर परिवार देता है 60 रुपए
सरपंच कमली बसंत और सचिव हेमलता साहू के नेतृत्व में योजना को पूरा किया गया। संचालन और रखरखाव के लिए ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति बनाई गई है। व्यवस्था के संचालन-संधारण के लिए हर परिवार 60 रुपए प्रतिमाह देता है। गांव के मिथिलेश बसंत तय समय पर पंप चलाकर पानी की आपूर्ति की जिम्मेदारी निभाते हैं।
नल से पानी पहुंचने के बाद सुबह का समय अब महिलाओं के घरेलू काम और बच्चों की पढ़ाई में लग रहा है। बच्चों को भी समय पर स्कूल पहुंचने में सुविधा हो रही है। सेवैयाकला की यह कहानी बताती है कि किसी योजना की सफलता सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों की बदली हुई दिनचर्या और जीवन में महसूस होने वाली राहत में दिखाई देती है।





