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CGPSC घोटाले में तत्कालीन एग्जाम कंट्रोलर को सुप्रीम कोर्ट से जमानत: आरती वासनिक एक साल से थीं हिरासत में, उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को भी राहत

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित CGPSC भर्ती घोटाला मामले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी है। आरती वासनिक पिछले एक साल से अधिक समय से हिरासत में थीं। उनके साथ तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को भी जमानत मिली है। जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस वराले की पीठ ने दोनों को राहत दी।

मामला CGPSC परीक्षा-2021 से जुड़ा है। इस भर्ती के जरिए 171 पदों पर चयन होना था। प्रारंभिक परीक्षा 13 फरवरी 2022 को हुई थी, जिसमें 2,565 अभ्यर्थी सफल हुए। इसके बाद 26 से 29 मई 2022 तक मुख्य परीक्षा आयोजित की गई। इसमें 509 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की। इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई थी।

चार्जशीट दाखिल होने के बाद मांगी थी जमानत

आरती वासनिक और ललित गनवीर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए दलील दी गई कि मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। मुकदमे में 100 से अधिक गवाह हैं और सुनवाई में देरी आरोपियों की वजह से नहीं हो रही है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण ट्रायल आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

जांच और ट्रायल रहेगा जारी

CGPSC भर्ती घोटाले में परीक्षा और इंटरव्यू प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं तथा प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच चल रही है। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद आरती वासनिक और ललित गनवीर को राहत मिली है, लेकिन इससे मामले की जांच या ट्रायल खत्म नहीं होगा। मामले में आगे न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।

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