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महासमुंद के किसान धान छोड़ मूंगफली की खेती की ओर बढ़े, बढ़ रही आमदनी

1,000 हेक्टेयर में हो रही मूंगफली की खेती, कम लागत और कम पानी में बेहतर मुनाफे की उम्मीद

रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसान अब पारंपरिक धान की खेती के साथ-साथ लाभकारी वैकल्पिक फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं।

महासमुंद जिले में खरीफ सीजन के दौरान धान के स्थान पर मूंगफली जैसी तिलहनी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

कृषि विभाग के प्रोत्साहन से जिले में करीब 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की खेती की जा रही है, जिससे किसानों की आय बढ़ने के साथ जल संरक्षण और फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

कृषि उपसंचालक एफ.आर. कश्यप ने बताया कि सरायपाली विकासखंड के ग्राम बोंदानवापाली के किसान फागू लाल कैवर्त और नंदकुमार कैवर्त इस बदलाव की मिसाल बने हैं।

दोनों किसानों ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत 1 जुलाई 2026 को धान के बजाय 0.40-0.40 हेक्टेयर भूमि पर मूंगफली की बुवाई की है।

किसानों का कहना है कि धान की तुलना में मूंगफली की खेती में कम पानी की जरूरत होती है।

इसकी लागत भी अपेक्षाकृत कम आती है, जबकि बाजार में बेहतर दाम मिलने से अधिक लाभ की संभावना रहती है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से वैज्ञानिक तरीके से बुवाई करने के कारण उन्हें अच्छी पैदावार की उम्मीद है।

कृषि विभाग के अनुसार जिले में धान के विकल्प के रूप में दलहन, तिलहन और अन्य लाभकारी फसलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है।

मूंगफली जैसी फसलें किसानों की आय बढ़ाने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और जल संसाधनों के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती हैं।

फागू लाल और नंदकुमार की सफलता आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

कृषि विभाग का मानना है कि यदि अधिक किसान धान के साथ वैकल्पिक फसलों को अपनाते हैं, तो खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ और जलवायु के अनुकूल बन सकेगी।

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