अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद में जांच तेज, गणना कक्ष कर्मचारी की बदली जीवनशैली पर उठे सवाल

अयोध्या। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी के मामले की जांच अब तेज हो गई है। मामले में जांच एजेंसियों ने मंदिर के गणना कक्ष में तैनात रहे एक कर्मचारी की गतिविधियों और अचानक बदली जीवनशैली को जांच के दायरे में लिया है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए 13 जून को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, जो पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है।
जांच के दौरान मिल्कीपुर निवासी अनुकल्प मिश्रा के बहनोई लवकुश मिश्रा का नाम सामने आया है। बताया जा रहा है कि करीब पांच महीने पहले उसकी ड्यूटी श्रीराम मंदिर के गणना कक्ष में लगाई गई थी। इसके बाद उसकी आर्थिक स्थिति और रहन-सहन में अचानक बदलाव की चर्चा शुरू हुई। ग्रामीणों के अनुसार, पहले सामान्य जीवन जीने वाला लवकुश गांव आने पर काफी पैसा खर्च करने लगा था। लोगों ने उसकी बढ़ती आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक बार उसने शराब के ठेके पर करीब 50 हजार रुपये खर्च किए थे, जिसके बाद गांव में उसकी चर्चा होने लगी। हालांकि, जांच एजेंसियां सभी तथ्यों की पुष्टि कर रही हैं और अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं।
इसी बीच एसओजी और पुलिस-प्रशासन की टीम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ लवकुश के गांव फगौली ठाकुरान पहुंचकर जानकारी जुटाई। टीम ने स्थानीय लोगों से पूछताछ भी की।
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी अयोध्या पहुंचे। उन्होंने रामलला के दर्शन किए और निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण किया, हालांकि चढ़ावे से जुड़े विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं की।
मामला तब सामने आया जब समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने 7 जून को दानपात्र और चढ़ावे की राशि में करोड़ों रुपये की कथित चोरी का आरोप लगाया। इसके बाद ट्रस्ट ने आरोपों को खारिज करते हुए नियमित ऑडिट की बात कही। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मामले में रिपोर्ट मांगी थी।
अब एसआईटी दान राशि के रिकॉर्ड, गणना प्रक्रिया, कर्मचारियों की भूमिका और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।





