परिसीमन पर तमिलनाडु में सियासत तेज: CM विजय की बैठक में 21 सांसद जुटे, बोले- राज्य का संसदीय प्रतिनिधित्व कम न हो

दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने शनिवार को राज्य के सांसदों की बैठक बुलाई। बैठक में केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन और इससे तमिलनाडु के संसदीय प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा हुई। हालांकि, सत्तारूढ़ DMK और AIADMK के सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए। कांग्रेस, VCK, CPI, CPI(M), MDMK और IUML के करीब 21 सांसद इसमें पहुंचे।
बैठक में सभी सांसदों ने इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य में परिसीमन की किसी भी व्यवस्था के तहत तमिलनाडु का लोकसभा में मौजूदा प्रतिनिधित्व कम नहीं होना चाहिए। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि इस मुद्दे को पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के अधिकार और संसद में उसका प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहना जरूरी है।
वहीं, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को समर्थन देने का ऐलान किया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने SAD के बदले रुख का स्वागत किया। SAD ने मांग की है कि परिसीमन के तहत राज्यों की लोकसभा सीटों में समान रूप से 50% बढ़ोतरी की जाए और महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू किया जाए।
543 से 816 हो सकती हैं लोकसभा सीटें
प्रस्तावित परिसीमन व्यवस्था के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना बताई जा रही है। महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। हालांकि, इसका वास्तविक क्रियान्वयन जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
अप्रैल में भी नहीं पास हो पाया था बिल
सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था। इसमें परिसीमन और संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी। 18 अप्रैल को संविधान के 131वें संशोधन विधेयक पर लोकसभा में वोटिंग हुई, लेकिन सरकार इसे पारित नहीं करा सकी। इसके बाद बाकी प्रस्तावित विधेयक भी पेश नहीं किए गए।
इस बीच NCPI सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने कहा कि परिसीमन को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सोमवार को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है।





