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कोरबा के वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल की PM मोदी ने की तारीफ: ‘कैच द रेन’ अभियान में बारिश की हर बूंद सहेजने पर जोर; 109 सरकारी भवनों में रूफटॉप हार्वेस्टिंग

कोरबा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में जल संरक्षण के लिए चलाए जा रहे कोरबा के वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल की सराहना की। उन्होंने ‘कैच द रेन’ अभियान का जिक्र करते हुए बारिश के पानी को सहेजने और उसे जमीन के भीतर पहुंचाने की जरूरत बताई। पीएम ने लोगों से जल संरक्षण के प्रयासों में भागीदारी की अपील की।

औद्योगिकीकरण और तेजी से बढ़ते कंक्रीटीकरण के बीच कोरबा में भविष्य के जल संकट से निपटने के लिए बारिश की हर बूंद को सहेजने का अभियान चलाया जा रहा है। केंद्र के ‘कैच द रेन’ और राज्य के ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के तहत जिला प्रशासन और नगर पालिक निगम की ओर से शहर से लेकर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों तक जल संचयन के काम किए जा रहे हैं।

109 सरकारी भवनों में रूफटॉप हार्वेस्टिंग

कोरबा के सार्वजनिक, सामुदायिक और सरकारी कार्यालयों समेत 109 प्रमुख सरकारी भवनों में रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट तैयार किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य बारिश के पानी को बहने से रोककर उसका उपयोग और भूजल पुनर्भरण करना है।

95 बंद बोरवेल को बनाया जा रहा रिचार्ज शाफ्ट

नगर निगम क्षेत्र में बेकार और बंद पड़े 95 बोरवेलों को वॉटर रिचार्ज शाफ्ट में बदला जा रहा है। इसके अलावा जिले के अलग-अलग हिस्सों में रीचार्ज बेड और रीचार्ज वेल बनाए जा रहे हैं, जिससे भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

नए भवनों में हार्वेस्टिंग पिट जरूरी

शहर में नए निजी और व्यावसायिक भवनों के निर्माण की अनुमति से पहले वॉटर हार्वेस्टिंग पिट बनाना अनिवार्य किया गया है। इससे भवनों की छत से निकलने वाला बारिश का पानी सीधे जमीन में पहुंचाया जा सकेगा।

नालों के पानी को साफ कर उद्योगों में होगा उपयोग

हसदेव नदी के संरक्षण के लिए शहर के 11 प्रदूषित नालों के पानी को ट्रीट करने के लिए 111 करोड़ रुपए की लागत से ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया जा रहा है। उपचारित पानी का उपयोग उद्योगों में किया जाएगा। इससे नदी के ताजे पानी के दोहन को कम करने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में मनरेगा के जरिए सोख्ता गड्ढे, डबरी और तालाबों का जीर्णोद्धार भी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बारिश का पानी गांवों में ही रोकना और भूजल स्तर को बढ़ाना है।

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