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मालदा हिंसा पर NIA का बड़ा खुलासा: सुनियोजित साजिश, कट्टरपंथी नेटवर्क और कई राज्यों तक फैले तार

दिल्ली। पश्चिम बंगाल के मालदा में चुनाव के दौरान हुई हिंसा और न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में बड़े और चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। एजेंसी के अनुसार यह घटना अचानक भड़की भीड़ की हरकत नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित और रणनीतिक साज़िश के तहत अंजाम दी गई थी।

जांच में संकेत मिले हैं कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कट्टरपंथी संगठनों की सक्रिय और गुप्त भूमिका हो सकती है। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ को इकट्ठा करने के लिए पहले से योजना बनाई गई थी। खास तौर पर ई-रिक्शा के जरिए इलाके में घोषणाएं कर लोगों को एक स्थान पर बुलाया गया, जिससे माहौल को जानबूझकर तनावपूर्ण और हिंसक बनाया जा सके।

एनआईए सूत्रों का कहना है कि घटना पहली नजर में भले ही अव्यवस्थित और अचानक लगी हो, लेकिन अब यह साफ हो रहा है कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एजेंसी ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में दो विशेष टीमें गठित की गई हैं।

जांच एजेंसी अब मालदा के साथ-साथ मुर्शिदाबाद में पहले हुई हिंसक घटनाओं की भी समीक्षा कर रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इन सभी घटनाओं के पीछे एक ही नेटवर्क सक्रिय है, जो लगातार क्षेत्र में अशांति फैलाने की साजिश रच रहा है।

एक और अहम खुलासा यह हुआ है कि घटना के दौरान कई संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे। एजेंसी अब इन कैमरों का फॉरेंसिक ऑडिट करवा रही है ताकि किसी भी तरह के तकनीकी छेड़छाड़ या साजिश के पहलू को उजागर किया जा सके।

सूत्रों के मुताबिक, जांच का दायरा अब पश्चिम बंगाल से बाहर बढ़ाकर बिहार और झारखंड तक किया जा सकता है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि मामला एक बड़े और बहु-राज्यीय नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।

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