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छत्तीसगढ़ में ऊदबिलाव की मौजूदगी की पुष्टि: उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कैमरे में कैद हुआ दुर्लभ वन्यजीव

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। विश्व ऊदबिलाव दिवस के मौके पर गरियाबंद जिले के उदंती सीतानदि टाइगर रिजर्व में ऊदबिलाव (ओटर) की प्रमाणिक मौजूदगी दर्ज की गई है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में चलाए गए अध्ययन के दौरान कैमरा ट्रैप में ऊदबिलाव की स्पष्ट तस्वीरें कैद हुई हैं।

गरियाबंद वनमंडल के डीएफओ वरुण जैन के सहयोग से लगाए गए कैमरों में मिले इन चित्रों ने यह साबित किया है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी स्वस्थ और सुरक्षित है।

विशेषज्ञों के मुताबिक ऊदबिलाव स्वच्छ और सुरक्षित जल स्रोतों में रहने वाला बेहद संवेदनशील वन्यजीव है। इसकी मौजूदगी किसी क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन और समृद्ध जैव विविधता का संकेत मानी जाती है।

दुनियाभर में ऊदबिलाव की 13 प्रजातियां पाई जाती हैं, जबकि भारत में यूरेशियन, स्मूद-कोटेड और एशियाई स्मॉल-क्लॉड ऊदबिलाव की तीन प्रमुख प्रजातियां मौजूद हैं। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ में इन तीनों प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है।

वन विभाग के अनुसार राज्य में वर्ष 2021 से ऊदबिलाव संरक्षण को लेकर लगातार शोध और अध्ययन किया जा रहा है। कोरबा, कांकेर, गरियाबंद और बस्तर संभाग में कैमरा ट्रैप और मैदानी अध्ययन के जरिए इनके व्यवहार, आवास और प्रजनन से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।

वन विभाग और विज्ञान सभा द्वारा स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि अब ग्रामीण और मछुआरे भी ऊदबिलाव संरक्षण के प्रति जागरूक हो रहे हैं।

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि जल स्रोतों को स्वच्छ रखें और जंगलों में प्लास्टिक या अन्य कचरा न फैलाएं, ताकि इस दुर्लभ वन्यजीव का प्राकृतिक आवास सुरक्षित रह सके।

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