नए वोटर के लिए नया नियम: अब माता-पिता के SIR का ब्योरा देना होगा, पहचान सत्यापन होगा आसान

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने पहली बार मतदाता बनने वाले आवेदकों के लिए नया नियम लागू किया है।
अब वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने वाले सभी नए मतदाताओं को अपने माता-पिता के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से संबंधित जानकारी भी देनी होगी।
आयोग के अनुसार, यह व्यवस्था पहले केवल पुराने मतदाताओं पर लागू थी, लेकिन अब नए आवेदकों के लिए भी इसे अनिवार्य कर दिया गया है।
चुनाव आयोग का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य नए मतदाताओं की पहचान का सत्यापन और रिकॉर्ड का मिलान अधिक प्रभावी ढंग से करना है।
इससे आवेदकों को बार-बार अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता भी कम होगी। साथ ही मतदाता सूची में डुप्लीकेट नाम, मृत व्यक्तियों, दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं तथा अपात्र या विदेशी नागरिकों के नामों की पहचान करने में भी आसानी होगी।
आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, ऑनलाइन फॉर्म-6 भरने वाले आवेदक भी माता-पिता के SIR संबंधी घोषणा पत्र के बिना आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकेंगे।
बिहार में जून 2025 में शुरू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान इस घोषणा पत्र को फॉर्म-6 के साथ जोड़ा गया था।
हालांकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म-6 में कोई औपचारिक संशोधन नहीं किया गया है, बल्कि प्रशासनिक निर्देशों के माध्यम से इस घोषणा को अनिवार्य बनाया गया है।
संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपोर्तेयर्स द्वारा SIR की पारदर्शिता पर उठाए गए सवालों को भी चुनाव आयोग ने खारिज किया है।
आयोग का कहना है कि यह पूरी तरह संवैधानिक और पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य केवल पात्र भारतीय नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और अपात्र नामों को हटाना है।
यदि किसी मतदाता का नाम सूची से हटता है, तो उसे अपील और आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि देश में करीब 21 साल बाद व्यापक स्तर पर SIR अभियान चलाया जा रहा है। इसे चरणबद्ध तरीके से विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है, ताकि मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जा सके।





