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छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर बड़ा खुलासा,बस्तर-जशपुर में बढ़े धर्मांतरण-मतांतरण के केस

रायपुर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में धर्मांतरण को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। एक पड़ताल में सामने आया कि बस्तर, जशपुर, अंबिकापुर और रायगढ़ क्षेत्रों के कई गांवों में बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हुआ है। कई जगहों पर स्थिति ऐसी बन गई है कि जहां पहले पारंपरिक धार्मिक मान्यताएं प्रचलित थीं, वहां अब ईसाई समुदाय बहुसंख्यक हो गया है।

ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, कई गांवों में मंदिर नहीं हैं, लेकिन 3 से 4 चर्च मौजूद हैं। आदिवासी समुदाय में जहां पहले दाह संस्कार की परंपरा थी, अब कई स्थानों पर दफनाने की प्रथा अपनाई जा रही है और कब्रों पर क्रॉस बनाए जा रहे हैं। जशपुर और सरगुजा संभाग के गांवों में यह बदलाव तेजी से देखने को मिला है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आर्थिक रूप से कमजोर, बीमार और सामाजिक रूप से उपेक्षित परिवारों को मिशनरियों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। गांव-गांव में पादरी (पास्टर) सक्रिय हैं, जो लोगों से संपर्क कर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कई स्थानों पर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से भी पहुंच बनाई जा रही है।

विदेशी फंडिंग को लेकर भी सवाल उठे हैं। विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (FCRA) के तहत राज्य में 146 एनजीओ पंजीकृत हैं, जिनमें करीब 50 मिशनरी संस्थाएं हैं। इनमें से अधिकांश जशपुर, अंबिकापुर, रायगढ़ और बस्तर में सक्रिय हैं। जांच एजेंसियों ने कुछ मामलों में विदेशी फंड के उपयोग को लेकर भी पड़ताल शुरू की है।

बढ़ते विवाद और शिकायतों के बीच राज्य सरकार ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 लाने की तैयारी की है। इसका उद्देश्य बल, प्रलोभन या धोखे से धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है। फिलहाल यह मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बना हुआ है।

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