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CM साय की बड़ी घोषणा: गुरु रविदास जयंती पर रहेगा सार्वजनिक अवकाश, नवा रायपुर के चौक का होगा नामकरण

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज का जीवन समरसता, समानता, भक्ति, श्रम और सामाजिक न्याय का अमर संदेश देता है।

उनके विचार आज भी समाज को भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता और समान अधिकारों का मार्ग दिखाते हैं।

मुख्यमंत्री राजधानी रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में गुरु रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कलश वंदन महाअभियान में शामिल हुए।

इस दौरान उन्होंने वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर से लाई गई पवित्र मिट्टी और जल से भरे कलश का पूजन कर इसे सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गुरु रविदास के सम्मान में कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि 2027 में गुरु रविदास जयंती (माघी पूर्णिमा) पर पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा।

इस दिन राज्यभर में मांस और मदिरा की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसके अलावा राज्य स्थापना दिवस पर दिए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों में गुरु रविदास के नाम से नया राज्य अलंकरण पुरस्कार शुरू किया जाएगा। वहीं, नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नामकरण भी संत गुरु रविदास के नाम पर किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में गुरु रविदास के प्रसिद्ध दोहे “ऐसा चाहूं राज मैं…” को अंकित कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से चर्चा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जब-जब समाज में अन्याय और भेदभाव बढ़ा, तब-तब संतों और महापुरुषों ने समाज को नई दिशा दी। गुरु रविदास का संदेश आज भी सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का मार्ग प्रशस्त करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र के अनुरूप प्रदेश सरकार सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कलश वंदन अभियान को सामाजिक समरसता का जनआंदोलन बताते हुए विश्वास जताया कि यह संत रविदास के विचारों को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाएगा। कार्यक्रम में कई मंत्री, विधायक, संत समाज के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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