कांकेर (उत्तर बस्तर)

Kanker: एक तरफ कोरोना की मार, तो दूसरी और खाली जलाशय ने बढ़ाई चिंता, आखिर कैसे बुझेगी खेतों की प्यास?

प्रसेनजीत साहा@कांकेर। (Kanker) परलकोट क्षेत्र का सबसे बड़ा खेती किसानी क्षेत्र हैं । परलकोट क्षेत्र में धान की फसल की कटाई के बाद तुरंत हजारों हेक्टेयर भूमि पर मक्के की फसल उगाया जाती है।

परलकोट जलाशय 9717 हेक्टेयर भूमि पर हैं एवं क्षेत्र में लगभग 5 हजार हेक्टेयर जमीन को परलकोट जलाशय की पानी से सिचाई किया जाता हैं।

कृषि क्षेत्र प्रधान क्षेत्र

दरअसल परलकोट क्षेत्र कृषि प्रधान क्षेत्र हैं। यहां निवासरत हजारों परिवार खेती किसानी से अपना गुजर बसर करते हैं। परलकोट में साल में दो बार फसलें उगाई जाती हैं। खरीफ फसल सीजन में परलकोट में भारी मात्रा में धान का खेती किसान करते हैं एवं रबी फसल सीजन में यह हजारों हेक्टेयर जमीन पर मक्के की खेती की जाती हैं।

कम बारिश से जलाशय में पानी ना के बराबर

(Kanker) जिस परलकोट जलाशय के भरोसे हजारों हेक्टेयर क्षेत्र पर मक्के की फसल उगाई जाती है. कम बारिश की वजह से जलाशय में पानी कम है. जिसने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं मानसून की विदाई होने वाली है, और सर्द हवाएं ठंडक का अहसास दिलाने लगी है। लेकि जलाशय का एक तिहाई हिस्सा ही भर पाया है।

खाली जलाशय को देखकर किसान मायूस

(Kanker) खाली जलाशय को देख कर क्षेत्र के किसान मायूस हो गए हैं। किसानों ने बताया है कि कोरोना की वजह से रबी फसल को काफी नुकसान हुआ है। इस साल परलकोट जलाशय का एक तिहाई भरना मतलब रबी फसला उगाना असंभव सा प्रतीत हो रहा है।

यहां से आता है पानी

परलकोट जलाशय में राजनांदगांव सहित महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले से बारिश का पानी बहकर परलकोट जलाशय में एकत्र होता है। जिससे विशाल जलाशय ओवर फ्लो होता है। जिसको देखने काफी संख्या में लोग आते हैँ। मगर इस साल परलकोट जलाशय में सन्नाटा पसरा हुआ है । क्षेत्र के किसान भी खाली जलाशय को देख निराश हो गए हैं।

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