2 लाख परिवारों का गृह प्रवेश, छत्तीसगढ़ को 3.65 लाख नए PM आवास

सक्ती में शिवराज सिंह चौहान और CM साय ने सौंपी घरों की चाबी; बस्तर में आवास सर्वे की समय-सीमा 31 अक्टूबर तक बढ़ी
सक्ती। सक्ती में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के राज्यस्तरीय गृह प्रवेश समारोह में छत्तीसगढ़ के 2 लाख गरीब परिवारों को उनके नए पक्के घर मिले। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से नए घरों की चाबी सौंपी। इसी कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ के लिए 3.65 लाख अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास मंजूर करने की घोषणा की।
शिवराज सिंह चौहान ने नवगठित सक्ती जिले में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने का ऐलान भी किया। वहीं बस्तर संभाग में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सर्वे की समय-सीमा बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 कर दी गई। अतिरिक्त आवासों की स्वीकृति का पत्र उन्होंने मुख्यमंत्री साय को सौंपा।
रोज 1600 से ज्यादा आवास पूरे
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत रोजाना 1600 से अधिक आवास पूरे किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गरीबों को पक्का घर देने के साथ उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, मुफ्त राशन, शौचालय और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गरीब परिवारों को पक्का मकान देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई थी। पिछले ढाई साल में प्रदेश में 11.50 लाख से ज्यादा आवास पूरे किए जा चुके हैं।
13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और बिहान के जरिए अब तक 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। महतारी वंदन योजना से करीब 70 लाख महिलाओं को लाभ मिल रहा है और अब तक 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि खातों में पहुंचाई गई है।
कार्यक्रम में एआई आधारित जियो-टैग सत्यापन, ‘सुघ्घर बाड़ी’ और ‘धार अपार’ अभियान शुरू किए गए। 270 नए इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टरों का विमोचन भी हुआ। उत्कृष्ट कार्य करने वाली लखपति दीदियों, डीलर दीदियों और पंचायत प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोई पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे। ग्रामीण विकास कार्यों में पारदर्शिता के लिए पंचायतों के विकास कार्यों पर बारकोड लगाने की व्यवस्था भी की जा रही है।





