फायर सेफ्टी पर हाईकोर्ट सख्त, बोला- सिर्फ टेंडर नहीं, जमीन पर दिखे काम; 21 जुलाई तक मांगी स्टेटस रिपोर्ट

बिलासपुर। लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया है।
कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि केवल टेंडर जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीन पर काम भी दिखाई देना चाहिए। वहीं, बिलासपुर जिला प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला इमारतों की व्यापक जांच के लिए विशेष समितियों का गठन किया है।
हाईकोर्ट ने मांगी प्रगति रिपोर्ट
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने फायर ब्रिगेड के आधुनिक वाहनों और उपकरणों की खरीद से जुड़े सभी टेंडरों की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि वर्क ऑर्डर और वास्तविक प्रगति भी दिखाई जानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी।
72.70 करोड़ के उपकरण खरीदने की तैयारी
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि 72.70 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक फायर उपकरण खरीदे जा रहे हैं। साथ ही 16 नए फायर स्टेशन स्थापित करने की योजना है।
हालांकि कई जिलों में अब तक जमीन उपलब्ध नहीं होने से परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई है। गरियाबंद, बेमेतरा, बालोद, सक्ती और सूरजपुर में जमीन मिल चुकी है, जबकि मुंगेली, जीपीएम, बीजापुर, सारंगढ़, सुकमा और नारायणपुर सहित 11 जिलों में प्रक्रिया लंबित है।
प्रशासन ने गठित की जांच समितियां
बिलासपुर जिला प्रशासन ने सभी कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला भवनों की फायर सेफ्टी जांच के लिए जिला और अनुविभाग स्तर पर समितियां बनाई हैं।
इन समितियों की अध्यक्षता एसडीएम करेंगे और इनमें पुलिस, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग तथा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारी शामिल रहेंगे। सभी टीमों को 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
हाल ही में छह कोचिंग संस्थानों की जांच में गंभीर सुरक्षा खामियां मिली थीं। एक कोचिंग संस्थान को सील किया गया, जबकि पांच को नोटिस जारी किए गए।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों और व्यावसायिक भवनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।





