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हाथी के नन्हे शावक की छठी, जंगल की सीमा पर ग्रामीणों ने की पूजा

रायगढ़। धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथी के नन्हे शावक की छठी मनाने का अनोखा मामला सामने आया है। गणेश चतुर्थी के दिन जन्मे शावक की करीब 15 दिन बाद मंगलवार को ग्रामीणों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान लोगों ने उसके स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की कामना की। आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ बच्चे भी शामिल हुए।

जानकारी के अनुसार, बाकारुमा रेंज के ससकोबा क्षेत्र में गणेश चतुर्थी के दिन हाथी के शावक का जन्म हुआ था। शावक के जन्म की जानकारी मिलने के बाद से ही आसपास के ग्रामीणों में उत्साह था। मंगलवार को गनपतपुर और ससकोबा के बीच पुल के पास पहाड़ी जंगल की सीमा पर छठी का कार्यक्रम रखा गया।

ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा की। जंगल की सीमा पर ही भोजन तैयार किया गया और सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। लोगों ने हाथी के शावक के स्वस्थ जीवन के साथ उसके सुरक्षित रहने की प्रार्थना की। जंगली हाथी के बच्चे की इस तरह छठी मनाने का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

कार्यक्रम में गनपतपुर के सरपंच हरिओमशंकर राठिया, हरिश्चंद्र राठिया, ससकोबा टीएसएस अध्यक्ष बोधसिंह राठिया, ससकोबा सरपंच पति अनिल कुमार राठिया, मुनेश्वर राठिया और रैरूमा खुर्द के अमित कुमार राठिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। बच्चों ने भी उत्साह के साथ आयोजन में हिस्सा लिया।

ससकोबा क्षेत्र में 31 हाथियों का दल

बताया गया है कि फिलहाल बाकारुमा रेंज के ससकोबा क्षेत्र में करीब 31 हाथियों का दल मौजूद है। वन विभाग की टीम लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है।

विभाग ने ग्रामीणों से हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और उनके करीब नहीं जाने की अपील की है। हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए आसपास के इलाकों में भी सतर्कता बरती जा रही है।

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