शिक्षा माफिया पर हाईकोर्ट का डंडा: बिना मान्यता स्कूल के विज्ञापनों पर जताई नाराजगी; शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा देने का आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों द्वारा बिना मान्यता के धड़ल्ले से प्रवेश के लिए विज्ञापन जारी करने के मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के स्कूल शिक्षा सचिव को ‘पर्सनल एफिडेविट’ (व्यक्तिगत हलफनामा) दाखिल करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला विकास तिवारी द्वारा जनहित याचिका में प्रस्तुत किए गए तथ्यों से सामने आया। कोर्ट को बताया गया कि सत्र 2026-27 के लिए कई निजी स्कूल बिना आवश्यक वैधानिक मान्यता के ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं और इसके लिए बड़े-बड़े विज्ञापन प्रकाशित किए जा रहे हैं।
5 फरवरी 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय ने रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं दिखा। कोर्ट ने विज्ञापन में शामिल स्कूलों—तुलसी कृष्णा किड्स एकेडमी (मोवा) के साथ ही शंकर नगर, न्यू राजेंद्र नगर, सुंदर नगर और शैलेंद्र नगर स्थित शाखाओं पर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने कृष्णा पब्लिक स्कूल, तुलसी को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘यह आदेशों की अवमानना’
डिवीजन बेंच ने मौखिक रूप से कहा कि बिना मान्यता के स्कूलों द्वारा एडमिशन का विज्ञापन देना अदालत के पुराने आदेशों की स्पष्ट अवमानना है। कोर्ट ने शिक्षा सचिव से पूछा है कि अब तक ऐसे स्कूलों पर ताला क्यों नहीं लटकाया गया और विज्ञापनों पर रोक क्यों नहीं लगी?
हाईकोर्ट ने विभाग को 24 मार्च 2026 तक का समय दिया है। इस दिन शिक्षा सचिव को यह बताना होगा कि अब तक किन स्कूलों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है। कोर्ट के इस कड़े रुख से उन निजी स्कूलों में हड़कंप मच गया है जो बिना कागजी औपचारिकताएं पूरी किए छात्रों का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं।





