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धर्मांतरण गतिविधियों के विरोध में ग्रामसभा का बड़ा फैसला, कांकेर के बड़े पराली गांव में बाहरी धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर रोक

कांकेर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक पहचान को संरक्षित रखने के लिए ग्रामीण लगातार सामूहिक पहल कर रहे हैं।

इसी कड़ी में कांकेर जिले के दुर्गूकोंदल विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम बड़े पराली में ग्रामसभा ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर धर्मांतरण गतिविधियों के उद्देश्य से आने वाले बाहरी ईसाई धर्म प्रचारकों, पादरियों और पास्टरों के गांव में प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला किया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से गांव में धर्म परिवर्तन के प्रयास किए जा रहे थे, जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक मतभेद बढ़ने लगे थे।

ग्रामीणों के अनुसार, कुछ लोगों के धर्म परिवर्तन के बाद वे पारंपरिक पूजा-पद्धतियों, स्थानीय देवी-देवताओं की आराधना और सामुदायिक आयोजनों से दूर होने लगे थे। इससे गांव की पुरानी सामाजिक व्यवस्था और एकजुटता प्रभावित होने की चिंता ग्रामीणों में बढ़ रही थी।

इसी मुद्दे को लेकर गांव में विशेष ग्रामसभा आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीणों ने अपनी बात रखी और सर्वसम्मति से बाहरी धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया।

निर्णय के बाद गांव के मुख्य प्रवेश द्वार पर सूचना बोर्ड भी लगाया गया है, ताकि बाहर से आने वाले लोगों को ग्रामसभा के फैसले की जानकारी मिल सके।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनका निर्णय किसी व्यक्ति या धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि अपनी आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और पूर्वजों की विरासत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

उनका कहना है कि संविधान और ग्रामसभा के अधिकारों के तहत वे अपनी सामाजिक व्यवस्था को मजबूत करना चाहते हैं।

इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र टेकाम ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति और सामूहिक एकता से होती है। उन्होंने परंपराओं के संरक्षण के लिए ग्रामीणों की जागरूकता की सराहना की। ग्रामसभा में ग्राम गायत दुर्जन कुमेटी, पटेल सनऊ उयके, सरपंच प्रतिनिधि मानिक कडियाम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

इससे पहले भी बस्तर संभाग के कई गांवों में ग्रामसभाओं ने स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को लेकर ऐसे प्रस्ताव पारित किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पेसा कानून के तहत मिले अधिकारों का हवाला देते हुए कई ग्रामसभाएं अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में निर्णय ले रही हैं।

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