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कच्चा तेल सस्ता, फिर भी पेट्रोल-डीजल महंगा: तेल कंपनियां प्रति लीटर ₹11 तक कमा रहीं, उपभोक्ताओं को राहत नहीं

दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले छह महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं, लेकिन इसका फायदा अब तक आम उपभोक्ताओं को नहीं मिला है।

इंडियन बास्केट का कच्चा तेल घटकर 68.69 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान बने 157 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से लगभग 56 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कोई कटौती नहीं की गई है।

डीएएम कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा कीमतों पर सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब 10.5 रुपये और डीजल पर 11 रुपये प्रति लीटर तक का मार्जिन कमा रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि 87 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कच्चे तेल की कीमत पर तेल कंपनियां ब्रेक-ईवन की स्थिति में रहती हैं। चूंकि एक जून के बाद से कीमतें लगातार इस स्तर से नीचे बनी हुई हैं, इसलिए कंपनियां लगातार मुनाफे में हैं।

पिछले वर्षों के आंकड़े भी बताते हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा।

वर्ष 2020 में जब कच्चा तेल 43.41 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था, तब भी पेट्रोल की कीमतों में सीमित कमी ही देखने को मिली। वहीं 2022 में कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने पर पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़ा दिए गए थे।

तेल कंपनियों के वित्तीय नतीजे भी मजबूत रहे हैं। जनवरी से मार्च 2026 की चौथी तिमाही में चार प्रमुख तेल कंपनियों का मुनाफा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 22 प्रतिशत बढ़ा। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी ऊंची थीं।

हालांकि, एक जुलाई को निजी कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर सस्ता किया था, लेकिन इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी सरकारी कंपनियों ने अभी तक कोई राहत नहीं दी है। ऐसे में उपभोक्ता सस्ते कच्चे तेल का लाभ मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

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