कच्चा तेल फिर 72 डॉलर प्रति बैरल पर, लेकिन पेट्रोल-डीजल सस्ता होने के लिए करना होगा इंतजार

दिल्ली। ईरान युद्ध के बाद बढ़े कच्चे तेल के दाम अब फिर से युद्ध-पूर्व स्तर पर लौट आए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसका फायदा आम लोगों को तुरंत नहीं मिलेगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत दशहरे के आसपास मिलने की संभावना है।
शांति वार्ता के बाद गिरे कच्चे तेल के दाम
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद स्विट्जरलैंड में हुई शांति वार्ता से वैश्विक बाजार में सकारात्मक माहौल बना। अमेरिका ने ईरानी तेल के निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में ढील दी, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति फिर सामान्य होने लगी। सोमवार के बाद से करीब 80 तेल टैंकर इस मार्ग से गुजर चुके हैं, जिससे आपूर्ति में सुधार और कीमतों में गिरावट देखने को मिली।
तुरंत सस्ता नहीं होगा पेट्रोल-डीजल
एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा के अनुसार, फिलहाल पेट्रोल और डीजल जिस कच्चे तेल से तैयार हो रहे हैं, वह तब खरीदा गया था जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। भारतीय रिफाइनरियों के लिए इसकी प्रभावी लागत करीब 125 डॉलर प्रति बैरल रही। ऐसे में मौजूदा सस्ते कच्चे तेल का असर बाजार तक पहुंचने में लगभग 75 से 80 दिन लगेंगे।
पहले होगी नुकसान की भरपाई
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां फिलहाल पेट्रोल-डीजल पर प्रति लीटर करीब 7.5 रुपये का नुकसान उठा रही हैं। सरकार द्वारा पहले घटाई गई एक्साइज ड्यूटी का असर भी बना हुआ है। इसलिए कंपनियां पहले अपने घाटे की भरपाई करेंगी, उसके बाद ही खुदरा कीमतों में कटौती की संभावना बनेगी।
दशहरे तक मिल सकती है राहत
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत से राहत के संकेत मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वास्तविक कमी दशहरे के आसपास देखने को मिल सकती है।





