जम्मू-कश्मीर में उमर सरकार पर संकट, 25 विधायक दे सकते हैं इस्तीफा

आज फारूक और उमर अब्दुल्ला से होगी नाराज विधायकों की मुलाकात; कैबिनेट में बदलाव और सलाहकार को हटाने की मांग
दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के करीब 25 नाराज विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को अपनी मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम दिया है।
शुक्रवार को श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला इन विधायकों से मुलाकात करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, मांगें नहीं माने जाने पर विधायक इस्तीफा देने का कदम उठा सकते हैं। हालांकि, पार्टी नेतृत्व की ओर से बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश की जा रही है।
विधायकों की प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर सोगमी को हटाना, डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी से सड़क निर्माण विभाग वापस लेना या उन्हें पद से हटाना और सरकार से जुड़े लोगों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शामिल है। विधायकों ने 30 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच कई गोपनीय बैठकें कर अपनी रणनीति भी तैयार की है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि विधायक अपनी शिकायतें रखने के लिए बैठक कर रहे हैं।
कैबिनेट विस्तार से बढ़ी नाराजगी
27 अक्टूबर को हुए कैबिनेट विस्तार के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ा। चार विधायकों को मंत्री बनाया गया, जबकि कई वरिष्ठ दावेदारों को जगह नहीं मिली। इनमें नजीर अहमद गुरेजी और मुबारक गुल के नाम शामिल हैं।
इसी बीच श्रीनगर के सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी ने भी नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ दी। उनका लोकसभा से इस्तीफा भी मंजूर हो चुका है।
इस्तीफों से कैसे बदल सकता है बहुमत का गणित?
90 निर्वाचित सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 46 विधायकों का समर्थन जरूरी है। NC के पास 41 विधायक हैं और गठबंधन को कांग्रेस, निर्दलीय तथा माकपा का समर्थन हासिल है।
यदि 25 विधायक इस्तीफा देते हैं और स्पीकर उसे मंजूर कर लेते हैं, तो सदन की प्रभावी संख्या घटेगी और सरकार का बहुमत प्रभावित हो सकता है। फिलहाल यह राजनीतिक संकट बातचीत से सुलझता है या नहीं, इस पर सबकी नजर है।





