धमतरी में श्वेत क्रांति की नई कहानी: सहकारिता और महिला शक्ति से बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

रोज 15 हजार लीटर तक पहुंचा दूध संग्रहण, लक्ष्य 20 हजार लीटर; डेयरी कारोबार से हजारों परिवार हो रहे आत्मनिर्भर
रायपुर। धान के कटोरे के रूप में पहचान रखने वाला धमतरी जिला अब श्वेत क्रांति के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई तस्वीर गढ़ रहा है।
जिला प्रशासन, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और पशुपालकों के संयुक्त प्रयासों से डेयरी व्यवसाय तेजी से संगठित हो रहा है।
इसका लाभ हजारों किसान परिवारों, विशेषकर महिलाओं को मिल रहा है, जो अब डेयरी उद्यमिता के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
जिले में वर्तमान में प्रतिदिन 10 से 15 हजार लीटर दूध का संग्रहण हो रहा है। इसे बढ़ाकर 20 हजार लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।
करीब 5 से 6 हजार किसान परिवार इस अभियान से जुड़े हैं। पशुपालकों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए दूध की कीमत 35-40 रुपए से बढ़ाकर 50 रुपए प्रति लीटर तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
डिजिटल भुगतान और सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को सीधे बैंक खातों में राशि मिल रही है।
धमतरी में निष्क्रिय पड़ी दुग्ध उत्पादक समितियों को पुनर्जीवित कर अब 68 से अधिक सक्रिय सहकारी समितियां संचालित की जा रही हैं।
इनके जरिए दूध का वैज्ञानिक परीक्षण, संग्रहण और विपणन हो रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है।
महिला सशक्तिकरण इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।
43 महिला दुग्ध उत्पादकों को झारखंड के सफल डेयरी मॉडल का अध्ययन कराया गया, जबकि 19 किसानों और समिति पदाधिकारियों को गुजरात के मेहसाणा भेजकर आधुनिक डेयरी तकनीकों का प्रशिक्षण दिलाया गया।
जिले में सेमरा-बी, भाठागांव और मुजगहन में चिलिंग प्लांट संचालित हैं।
वहीं कुरूद में नए प्लांट और छाती क्षेत्र में आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट की तैयारी चल रही है।
प्रशासन अब इस मॉडल का विस्तार नगरी और मगरलोड जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार डेयरी व्यवसाय से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।





