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छत्तीसगढ़ में अब 21 दिन में जन्म-मृत्यु का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य; मंत्रालय में हुई हाई-लेवल बैठक

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जन्म और मृत्यु के आंकड़ों को सटीक बनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुँचाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है।

शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समन्वय समिति (IDCC) की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। विभागीय सचिव भुवनेश यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पंजीयन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और हाईटेक बनाने पर जोर दिया गया।

7 दिन में फ्री सर्टिफिकेट, देरी पर लगेगा जुर्माना

बैठक में छत्तीसगढ़ जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की गई। सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब किसी भी जन्म या मृत्यु का पंजीयन 21 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य होगा। निजी और सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि डिस्चार्ज से पहले ही जन्म प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।

पंजीयन के बाद पहला प्रमाण पत्र 7 दिनों के भीतर निःशुल्क प्रदान करना होगा। तय समय सीमा के बाद पंजीयन कराने पर निर्धारित विलंब शुल्क देना होगा।

आंकड़ों का गणित: जन्म दर 108% पार

संचालक श्रीमती रोक्तिमा यादव ने वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट पेश की। वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार:

  • जन्म पंजीयन: सकल दर 108.4% और शुद्ध दर 71.7% रही।
  • मृत्यु पंजीयन: सकल दर 102.6% और शुद्ध दर 92.5% दर्ज की गई। जिन जिलों में प्रगति कम है, वहां विशेष अभियान चलाकर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम, आधार से लिंक होगा डेटा

बैठक में UIDAI की उप महानिदेशक पी. संगीता और जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल भी शामिल हुए। सुरक्षा के लिहाज से कई बड़े फैसले लिए गए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब जन्म प्रमाण पत्र के साथ ही आधार नंबर जनरेशन का समन्वय किया जाएगा।

सभी पंजीयन अब एकीकृत पोर्टल पर होंगे ताकि डेटा सुरक्षित रहे। 2015 से 2022 तक के पुराने रिकॉर्ड्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर माइग्रेट करने का काम तेज किया जाएगा। सारा डेटा सुरक्षित रखने के लिए एनआईसी क्लाउड का उपयोग होगा, जिससे फर्जी पंजीयन की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

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