गरबा हमारी संस्कृति और मातृशक्ति के सम्मान का प्रतीक: CM साय

रायपुर के कई गरबा उत्सवों में शामिल हुए मुख्यमंत्री, कहा- महतारी वंदन से 68 लाख महिलाओं को हर महीने मिल रही 1,000 रुपए की सहायता
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि गरबा महोत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, सामाजिक एकता और मातृशक्ति के सम्मान का प्रतीक है। नवरात्रि का पर्व आस्था और भक्ति के साथ महिलाओं के सामर्थ्य, गरिमा और समाज निर्माण में उनके योगदान का स्मरण कराता है।
मुख्यमंत्री रविवार को रायपुर में आयोजित विभिन्न गरबा महोत्सवों और दुर्गा पूजा आयोजनों में शामिल हुए। उन्होंने प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने माना बाजार सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति और सार्वजनिक श्री श्री दुर्गा पूजा समिति के पंडालों में पहुंचकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे हुकुम ललित महल में आयोजित ‘रास गरबा विथ भजन डांडिया’, रामबाग के रास गरबा, पचपेड़ी नाका स्थित राम मंगलम लॉन में ‘सोरठी रंग रंगीलो’ और शंकर नगर के बीटीआई मैदान में आयोजित ‘संकल्प गरबा’ उत्सव में शामिल हुए।
महिलाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। महिलाओं का सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं, तो परिवार और समाज भी मजबूत होता है।
उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की करीब 68 लाख महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे महिलाएं घरेलू जरूरतों, बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं पर खर्च के लिए स्वयं निर्णय ले पा रही हैं।
14 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह उनकी मेहनत, उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता का प्रमाण है। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के साथ उन्हें स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ाना भी है।
साय ने कहा कि गुजरात की सांस्कृतिक परंपरा से निकला गरबा आज देशभर में लोकप्रिय है। ऐसे आयोजन विभिन्न समाजों और पीढ़ियों को जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि विकास के साथ संस्कृति और आस्था का संरक्षण भी सरकार की प्रतिबद्धता है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के प्रमुख देवी शक्तिपीठों के विकास पर भी काम किया जा रहा है।





