ट्रम्प के फोन के बाद अमेरिकी खिलाड़ी का रेड कार्ड रद्द, फीफा वर्ल्ड कप में पहली बार राजनीतिक दखल पर विवाद

दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप में अमेरिकी फुटबॉलर फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से फोन पर बात करने के बाद बालोगुन पर लगा एक मैच का प्रतिबंध हटा दिया गया। इसके बाद उन्हें बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में खेलने की अनुमति मिल गई।
हालांकि, बालोगुन के मैदान पर उतरने के बावजूद अमेरिकी टीम को हार का सामना करना पड़ा। बेल्जियम ने अमेरिका को 4-1 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। इस पूरे मामले को लेकर फीफा की निष्पक्षता और फैसले लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
यह फीफा वर्ल्ड कप इतिहास का पहला ऐसा मामला बताया जा रहा है, जब किसी राष्ट्राध्यक्ष ने किसी खिलाड़ी की सजा कम कराने के लिए हस्तक्षेप किया और उसके बाद फैसला बदला गया। बेल्जियम फुटबॉल संघ और यूरोपीय फुटबॉल यूनियन ने फीफा के इस फैसले का विरोध किया है।
बालोगुन को पिछले मुकाबले में बोस्निया-हर्जेगोविना के खिलाफ डिफेंडर तारिक मुहारेमोविक पर फाउल के बाद रेड कार्ड दिखाया गया था। नियमों के अनुसार उन्हें एक मैच का निलंबन झेलना था, लेकिन फीफा ने रिव्यू के बाद उन्हें खेलने की अनुमति दे दी। बेल्जियम फुटबॉल महासंघ की अपील भी खारिज कर दी गई।
ट्रम्प ने खुद इस मामले में दखल देने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि उन्होंने फीफा अध्यक्ष से बात कर फैसले की समीक्षा करने को कहा था, क्योंकि उन्हें लगा कि यह फाउल रेड कार्ड के लायक नहीं था।
वहीं, फीफा अध्यक्ष इन्फेंटिनो ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अनुशासन समिति ने नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र फैसला लिया है। हालांकि, इस घटना ने खेल और राजनीति के संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
वर्ल्ड कप इतिहास में इससे पहले 1962 में ब्राजील के गैरिंचा का रेड कार्ड रद्द हुआ था, लेकिन उस समय नियम अलग थे और खिलाड़ियों पर तत्काल प्रतिबंध की व्यवस्था नहीं थी।





