आतिफ असलम बोले- पाकिस्तान का कोक स्टूडियो बेहतर, इंडियन वर्जन में कमर्शियलाइजेशन ज्यादा

मुंबई। पाकिस्तानी सिंगर आतिफ असलम ने भारत और पाकिस्तान के लोकप्रिय म्यूजिक प्लेटफॉर्म ‘कोक स्टूडियो’ की तुलना करते हुए पाकिस्तान के वर्जन को बेहतर बताया है। दुबई के रेडियो स्टेशन मिर्ची यूएई को दिए इंटरव्यू में आतिफ ने कहा कि पाकिस्तान कोक स्टूडियो की सफलता के पीछे ‘रॉ और ओरिजनल’ म्यूजिक है, जबकि इंडियन कोक स्टूडियो में कमर्शियलाइजेशन ज्यादा दिखाई देता है।
आतिफ ने कहा कि दोनों देशों में संगीत की कंपोजिशन अच्छी होती है, लेकिन भारतीय संगीत में वह रॉ-नेस कम है, जो पाकिस्तानी गानों में देखने को मिलती है। उनके मुताबिक इंडियन कोक स्टूडियो गानों को बाजार की जरूरत के हिसाब से ढालता है, जबकि पाकिस्तान कोक स्टूडियो ओरिजनल कंपोजिशन पर ज्यादा ध्यान देता है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्लेटफॉर्म पर संगीतकारों को अपनी कला और अलग पहचान दिखाने की ज्यादा आजादी मिलती है। यही वजह है कि वहां के गानों में अलग तरह की ताजगी और मौलिकता दिखाई देती है।
2008 में शुरू हुआ था कोक स्टूडियो पाकिस्तान
कोक स्टूडियो पाकिस्तान की शुरुआत 2008 में रोहेल हयात ने की थी। इसमें सूफी, कव्वाली, गजल और लोक संगीत को आधुनिक वेस्टर्न इंस्ट्रूमेंट्स के साथ मिलाकर फ्यूजन म्यूजिक तैयार किया गया। ‘पसूरी’, ‘आफरीन आफरीन’ और आतिफ असलम का ‘ताजदार-ए-हरम’ इसके सबसे लोकप्रिय गानों में शामिल हैं।
भारत में कोक स्टूडियो की शुरुआत 2011 में ‘एमटीवी कोक स्टूडियो इंडिया’ के नाम से हुई थी। 2023 में इसे ‘कोक स्टूडियो भारत’ के नाम से दोबारा लॉन्च किया गया। ‘अर्ज किया है’, ‘की बनु दुनिया दा’ और ‘खलासी’ जैसे गाने काफी लोकप्रिय हुए।
बोले- भारतीय फैंस की याद आती है
आतिफ ने भारत में पाकिस्तानी कलाकारों पर लगे बैन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय फैंस वीपीएन के जरिए उनका संगीत सुनते हैं। आतिफ ने कहा कि उन्हें भारत में काम करने की नहीं, बल्कि वहां के फैंस की याद आती है।
2016 के उरी आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी कलाकारों के भारत में काम करने को लेकर रोक का विवाद शुरू हुआ था। 2019 के पुलवामा हमले के बाद यह रोक और सख्त हुई। 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी ऑनलाइन कंटेंट पर भी भारत में प्रतिबंध लगाया गया।





