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अस्पताल के बेड से सीधे ‘गोल्ड’ तक: अरुणाचल की अनाई ने बीमारी को हरा जीता सोना; भाई का सपना किया पूरा

रायपुर। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) 2026 में जीत की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो जज्बे और जुनून की मिसाल है। अरुणाचल प्रदेश की 21 वर्षीय वेटलिफ्टर अनाई वांगसु ने महिलाओं के 58 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। हैरानी की बात यह है कि रायपुर रवाना होने से कुछ दिन पहले तक अनाई अस्पताल में भर्ती थीं और उन्हें ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था।

बीमारी से जंग: जब शरीर ने साथ छोड़ दिया

अनाई 2019 से गंभीर गैस्ट्रिक समस्या से जूझ रही हैं। यह बीमारी उन्हें अचानक इतना कमजोर और डिहाइड्रेटेड कर देती है कि चलना भी मुश्किल हो जाता है। रायपुर आने से पहले उनकी हालत बिगड़ी और उन्हें ‘इंट्रावेनस फ्लूइड्स’ पर रखा गया। लेकिन अनाई ने हार नहीं मानी। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के अगले ही दिन वह ट्रेनिंग ग्राउंड पर लौट आईं क्योंकि उन्हें अपने ‘सिल्वर’ को ‘गोल्ड’ में बदलना था।

भाई का अधूरा सपना और मैरी कॉम की प्रेरणा

वांगचो जनजाति से आने वाली अनाई असल में बॉक्सर बनना चाहती थीं। वे मैरी कॉम की फिल्म से बेहद प्रभावित थीं। लेकिन उनके बड़े भाई सिंचाड बांसु, जो खुद एक नेशनल वेटलिफ्टर रहे हैं, उन्होंने अनाई की ताकत को पहचाना और उन्हें वेटलिफ्टिंग की ओर मोड़ा। आज सिंचाड अरुणाचल पुलिस में हैं, लेकिन उनकी बहन उनके अधूरे सपनों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने के लिए पसीना बहा रही है।

परिवार पूछता था सोना कब लाओगी

जीत के बाद भावुक अनाई ने कहा, “पिछली बार जब मैं गोल्ड चूकी थी, तो बहुत रोई थी। परिवार हमेशा पूछता था कि स्वर्ण पदक कब जीतेगी? आज यह मेडल मेरे हाथ में है और सब बहुत खुश हैं। यह गोल्ड मुझे भरोसा दिलाता है कि मेरी बीमारी मेरी मेहनत से बड़ी नहीं है।”

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