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रायपुर में 101, बिलासपुर में 65 फीट के रावण का दहन, जमकर हुई आतिशबाजी

दुर्ग में बग्गी पर सवार होकर पहुंचे राम-सीता और लक्ष्मण; बिलासपुर में दशहरा आयोजन को लेकर विवाद, कोंडागांव में रावण के साथ मेघनाथ-कुंभकरण के पुतले भी जले

रायपुर। छत्तीसगढ़ में विजयादशमी का पर्व मंगलवार को धूमधाम से मनाया गया। रायपुर के WRS मैदान में प्रदेश के सबसे ऊंचे 101 फीट के रावण का दहन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी मौजूद रहे। रावण दहन के साथ हुई आतिशबाजी से मैदान रोशन हो उठा। बिलासपुर में 65 फीट ऊंचे रावण का दहन हुआ, जबकि दुर्ग में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण बग्गी में सवार होकर उत्सव में पहुंचे।

बिलासपुर के रेलवे ग्राउंड में विधायक अमर अग्रवाल ने रावण दहन किया। कार्यक्रम में महापौर, रेलवे अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। हालांकि, शहर के साइंस कॉलेज मैदान में दशहरा आयोजन को लेकर विवाद भी हुआ।

वर्षों से उत्सव आयोजित कर रहे अर्पांचल लोक मंच के पदाधिकारियों ने विरोध जताया। पुलिस की रोक के बावजूद उन्होंने मैदान के मुख्य गेट के सामने रावण का पुतला जलाया और विधायक व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। मंच ने आयोजन में सरकारी हस्तक्षेप और कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही।

कोंडागांव के विकास नगर मैदान में 60 फीट के रावण के साथ मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों का भी दहन किया गया। बलौदाबाजार जिले के पलारी में 40 फीट ऊंचा रावण जलाया गया। अंबिकापुर में 80 फीट के रावण का दहन प्रस्तावित था, जबकि रायगढ़ में रामलीला मैदान, मिनी स्टेडियम और नटवर हाई स्कूल मैदान में आयोजन हुए।

दुर्ग-भिलाई में रविशंकर स्टेडियम सहित सात स्थानों पर दशहरा उत्सव आयोजित किया गया। वहीं, चिरमिरी के कोरिया कॉलरी में तालाब के बीच बने टापू पर रावण दहन की अनूठी परंपरा निभाई जाती है।

बस्तर के जगदलपुर में रावण दहन नहीं होता। यहां 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरा की अलग परंपरा है, जिसमें स्थानीय रीति-रिवाजों और देवी दंतेश्वरी की आराधना का विशेष महत्व है।

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