अबूझमाड़ में पहली बार खुले 10 नए तेंदूपत्ता फड़: 22 गांवों के 365 संग्राहकों को मिला सीधा लाभ, खातों में पहुंचे 8.86 लाख रुपए

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की नई तेंदूपत्ता संग्रहण नीति अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों के लिए राहत और रोजगार का नया जरिया बन गई है।
वर्ष 2026 में पहली बार असीमांकित क्षेत्रों में 10 नए तेंदूपत्ता फड़ खोले गए हैं, जिससे ग्रामीणों को अपने गांव के नजदीक ही तेंदूपत्ता बेचने की सुविधा मिल रही है। इससे उनका समय, श्रम और परिवहन खर्च बचने के साथ आय में भी बढ़ोतरी हुई है।
पहले ग्रामीणों को तेंदूपत्ता बेचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर फड़ खुलने से संग्रहण कार्य आसान हो गया है। ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर भी बढ़े हैं और उन्हें समय पर भुगतान मिल रहा है।
राज्य शासन ने वर्ष 2026 के लिए तेंदूपत्ता की दर 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा तय की है। ग्रामीणों की मांग पर वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर वन विभाग ने छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ से अनुमति लेकर अबूझमाड़ क्षेत्र में नए फड़ शुरू किए।
22 गांवों के 365 संग्राहकों को मिला लाभ
इस पहल के तहत कलमानार, ओकपाड़, कुतुल, निरामेटा, कोडकानार, कानागांव, कच्चापाल, टेकानार, बांहकेर और रायनार में 10 नए तेंदूपत्ता फड़ स्थापित किए गए। इनके माध्यम से 22 गांवों के 365 संग्राहकों ने 161.254 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया।
संग्रहण के एवज में 8 लाख 86 हजार 897 रुपए की राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में भेजी गई। पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान से ग्रामीणों का शासन पर भरोसा भी मजबूत हुआ है।
सरकार का मानना है कि यह पहल केवल तेंदूपत्ता संग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार, आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
अबूझमाड़ के ग्रामीणों के लिए यह योजना विकास और बेहतर आजीविका की नई उम्मीद बनकर सामने आई है।





