वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई समयसीमा खत्म होने के बाद अब भारत समेत कई देश रूस और ईरान से तेल नहीं खरीद पाएंगे। अमेरिकी प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इन दोनों देशों से ऊर्जा खरीद पर दी गई अस्थायी छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 15 अप्रैल को घोषणा करते हुए कहा कि रूस और ईरान के तेल के लिए जारी “जनरल लाइसेंस” का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। रूसी तेल पर छूट 11 अप्रैल को समाप्त हो चुकी है, जबकि ईरानी तेल के लिए दी गई राहत 19 अप्रैल तक ही मान्य रहेगी।
दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ा था। इसी कारण अमेरिका ने पहले 30 दिन की अस्थायी छूट दी थी, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रह सकें। 12 मार्च को अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारतीय रिफाइनरियों को पहले से लदे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी थी।
बेसेंट के मुताबिक, यह छूट केवल उन तेल खेपों के लिए थी जो प्रतिबंध लागू होने से पहले जहाजों में लदी थीं या रास्ते में थीं। अब वह सारा तेल या तो उपयोग हो चुका है या बाजार में बिक चुका है, इसलिए आगे छूट देने की जरूरत नहीं समझी गई।
इस फैसले का भारत जैसे देशों पर असर पड़ सकता है, जो सस्ती दरों पर रूस और ईरान से कच्चा तेल आयात करते रहे हैं। अब भारत को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ सकती है, जिससे ईंधन की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में नई अस्थिरता ला सकता है और आने वाले समय में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
