एक स्कैन में खुला पंचायत का पूरा हिसाब: QR कोड 7 लाख बार स्कैन, अब काम और भुगतान की जानकारी ऑनलाइन

रायपुर। सुशासन, पारदर्शिता और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू की गई क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली ने एक साल पूरा कर लिया है।
पहले मनरेगा और अब वीबी-जी राम जी योजना के तहत प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में लगाए गए क्यूआर कोड के जरिए ग्रामीणों को पंचायत में पिछले तीन वर्षों में हुए कार्यों, भुगतान और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां एक ही जगह मिल रही हैं।
7 लाख से ज्यादा बार स्कैन
सरकारी जानकारी के अनुसार, पिछले एक साल में इन क्यूआर कोड को 7 लाख से अधिक बार स्कैन किया गया। यानी रोजाना औसतन 2 हजार से ज्यादा बार ग्रामीणों और आम लोगों ने योजना से जुड़ी जानकारी हासिल की। इससे माना जा रहा है कि गांवों में भी सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
कार्यालय जाने की जरूरत कम
क्यूआर कोड से ग्रामीण अपने क्षेत्र में कराए गए कार्यों और उनके भुगतान की जानकारी खुद देख सकते हैं। इससे जानकारी लेने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हुई है। पहले जहां लोग ‘सूचना मांगते’ थे, वहीं अब उन्हें ‘सूचना देखने’ की सुविधा मिल रही है।
जानकारी सार्वजनिक होने से ग्राम पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत हुई है। साथ ही विकास कार्यों की सामाजिक निगरानी और जनभागीदारी को भी बढ़ावा मिला है।
आरटीआई और शिकायतों में कमी
योजना से जुड़ी जानकारी पंचायत स्तर पर ही उपलब्ध होने का असर आरटीआई आवेदनों और संबंधित शिकायतों पर भी पड़ा है। जानकारी आसानी से मिलने से ऐसे आवेदनों और शिकायतों में कमी आई है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बनी है।
मुख्यमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मान
क्यूआर कोड आधारित इस नवाचार को इसकी उपयोगिता और प्रभावशीलता के लिए मुख्यमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है। यह पहल तकनीक के जरिए ग्राम पंचायत स्तर तक सुशासन और पारदर्शिता पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
‘जानकारी सबकी, निगरानी सबकी’ की अवधारणा पर आधारित यह व्यवस्था ग्रामीणों को अपने क्षेत्र के विकास कार्यों की जानकारी लेने और उनकी निगरानी में सहभागी बनने का अवसर दे रही है।





