राज्योत्सव: 650 मूर्तियां, डिजिटल तकनीक से जीवंत हुईं जनजातीय वीरों की शौर्यगाथाएं

नवा रायपुर का जनजातीय संग्रहालय बना इतिहास और आधुनिक तकनीक का संगम, अब तक 3 लाख से अधिक लोग पहुंचे
रायपुर। छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की गाथाएं अब आधुनिक डिजिटल तकनीक के जरिए जीवंत हो रही हैं।
नवा रायपुर अटल नगर में बना ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ देश में जनजातीय शौर्य और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाला विशेष केंद्र बन गया है। करीब 50 से 55 करोड़ रुपए की लागत से बने इस संग्रहालय का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2025 को राज्य स्थापना की रजत जयंती पर किया था।
650 से अधिक मूर्तियों में दिखेगा इतिहास
जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में बने संग्रहालय में 650 से अधिक जीवंत मूर्तिशिल्पों के माध्यम से जनजातीय संघर्षों को प्रदर्शित किया गया है। हल्बा, परलकोट, तारापुर, लिंगागिरी, मुरिया और भूमकाल विद्रोह से लेकर सोनाखान विद्रोह तक की घटनाओं को यहां जगह मिली है। झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह की विशेष दीर्घाएं भी बनाई गई हैं।
वीएफएक्स और क्यूआर कोड से मिलेगी जानकारी
संग्रहालय में वीएफएक्स, डिजिटल प्रोजेक्शन और दृश्य-श्रव्य माध्यमों से ऐतिहासिक घटनाओं को प्रस्तुत किया गया है। डिजिटल बोर्ड और क्यूआर कोड स्कैन कर आगंतुक सेनानियों और विद्रोहों से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रशिक्षित गाइड भी इतिहास से परिचित कराते हैं।
अब तक 3 लाख से ज्यादा पहुंचे दर्शक
सामान्य दिनों में यहां एक से दो हजार और छुट्टियों में चार से पांच हजार तक दर्शक पहुंच रहे हैं। शुरुआत से अब तक तीन लाख से अधिक लोग संग्रहालय देख चुके हैं। यहां पेयजल, पार्किंग, सीसीटीवी, प्राथमिक उपचार, व्हीलचेयर और शिशु देखभाल कक्ष जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और जनजातीय कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में बना यह संग्रहालय नई पीढ़ी को जनजातीय नायकों के योगदान से परिचित करा रहा है। साथ ही नवा रायपुर में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन की संभावनाओं को भी बढ़ा रहा है।





